बहरामपुर में अधीर चौधरी को दिखाए गए काले झंडे, ‘गो-बैक’ के नारों के बीच हंसते हुए निकले कांग्रेस नेता

पश्चिम बंगाल की राजनीति के दिग्गज नेता और बहरामपुर से कांग्रेस उम्मीदवार अधीर रंजन चौधरी को एक बार फिर भारी विरोध का सामना करना पड़ा है। रविवार की सुबह जब अधीर अपने क्षेत्र में चुनाव प्रचार के लिए निकले, तो टीएमसी कार्यकर्ताओं ने उन्हें घेर लिया और ‘गो-बैक’ के नारे लगाए। हालांकि, अधीर चौधरी इन सबसे बेफिक्र नजर आए और प्रदर्शनकारियों के बीच से मुस्कुराते हुए अपना प्रचार जारी रखा।

लगातार तीसरे दिन विरोध: यह लगातार तीसरा दिन है जब अधीर चौधरी को उनके निर्वाचन क्षेत्र में बाधा पहुंचाई गई। बहरामपुर नगर पालिका के वार्ड नंबर ३ में टीएमसी समर्थकों ने झंडे लेकर उनके काफिले को रोका। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए केंद्रीय बलों को हस्तक्षेप करना पड़ा। आरोप है कि २१ नंबर वार्ड में प्रचार के दौरान टीएमसी और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच हिंसक झड़प भी हुई। टीएमसी का दावा है कि अधीर अब इस क्षेत्र में प्रासंगिक नहीं रहे, जबकि कांग्रेस इसे टीएमसी की हताशा बता रही है।

अधीर का तीखा पलटवार: विरोध प्रदर्शनों पर प्रतिक्रिया देते हुए अधीर चौधरी ने कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा, “कुत्तों के भौंकने से मेरा सिरदर्द नहीं होता। हम जनता के पास जाएंगे, वोट मांगेंगे और चुनाव शांतिपूर्ण ढंग से कराएंगे। पिछली बार नगर निकाय चुनावों में लोगों को डराया गया था, लेकिन इस बार मैं ऐसा नहीं होने दूंगा। बहरामपुर के लोग मुझ पर भरोसा रखें, मैं इस शहर को आतंक मुक्त बनाऊंगा।”

बहरामपुर का सियासी समीकरण: दिलचस्प बात यह है कि जिस क्षेत्र में विरोध हो रहा है, वहां वर्तमान में भाजपा का कब्जा है। विशेषज्ञों का मानना है कि टीएमसी जानबूझकर लड़ाई को ‘टीएमसी बनाम कांग्रेस’ बनाने की कोशिश कर रही है ताकि भाजपा को हाशिए पर धकेला जा सके। हालांकि बहरामपुर को अधीर का गढ़ माना जाता है, लेकिन पिछले लोकसभा चुनाव में युसूफ पठान से मिली हार के बाद समीकरण बदल गए हैं। अब देखना यह है कि केंद्रीय बलों के साये में हो रहा यह चुनाव अधीर की किस्मत बदलता है या टीएमसी का दबदबा बरकरार रहता है।

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