७ साल बाद भारत ने फिर खरीदा ईरान से तेल! अमेरिका के दबाव को दरकिनार कर मोदी सरकार का बड़ा फैसला

वैश्विक उथल-पुथल के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। लगभग सात साल के लंबे अंतराल के बाद, भारत ने फिर से ईरान से कच्चा तेल खरीदना शुरू कर दिया है। शनिवार को केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय ने इस बात की पुष्टि की। साल २०१९ में अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण भारत ने ईरान से तेल आयात बंद कर दिया था, लेकिन अब मध्य पूर्व (Middle East) में बढ़ते तनाव और सप्लाई चेन में आ रही दिक्कतों को देखते हुए नई दिल्ली ने फिर से तेहरान का रुख किया है।

पेमेंट की समस्या हुई खत्म: पेट्रोलियम मंत्रालय ने ‘एक्स’ (पहले ट्विटर) पर जानकारी दी है कि अब ईरान से तेल आयात करने में वित्तीय लेनदेन (Payment) को लेकर कोई बाधा नहीं है। दरअसल, अमेरिका ने हाल ही में अस्थायी रूप से ईरानी तेल और रिफाइंड उत्पादों पर से प्रतिबंध हटा लिए हैं, जिससे भारतीय रिफाइनरियों के लिए रास्ता साफ हो गया है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जारी तनाव के कारण भारत के लिए तेल की वैकल्पिक व्यवस्था करना अनिवार्य हो गया था।

मैंगलोर बंदरगाह पर पहुंचा ईरानी एलपीजी: भारत ने न केवल तेल, बल्कि ४४,००० मीट्रिक टन ईरानी एलपीजी (LPG) भी खरीदी है। बुधवार को यह गैस लेकर एक जहाज मंगलौर बंदरगाह पर पहुंचा, जहां वर्तमान में गैस उतारने का काम चल रहा है। दिलचस्प बात यह है कि यह जहाज पहले प्रतिबंधों के घेरे में था, लेकिन भारत ने अपनी जरूरतों को देखते हुए यह सौदा पूरा किया। मंत्रालय का कहना है कि भारतीय कंपनियों को दुनिया के किसी भी स्रोत से तेल खरीदने की पूरी आजादी और लचीलापन हासिल है।

कूटनीतिक जीत: भारत अपनी जरूरत का कच्चा तेल ४० से अधिक देशों से आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय मंच पर ईरान और अमेरिका के बीच जारी जुबानी जंग के बीच भारत का यह फैसला उसकी स्वतंत्र विदेश नीति को दर्शाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान से तेल की दोबारा खरीद शुरू होने से भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतों में स्थिरता आने की संभावना है।

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