1 अप्रैल से लागू हुआ नया लेबर कोड! क्या आपकी टेक-होम सैलरी कम हो जाएगी? जानें ग्रेच्युटी का नया गणित

1 अप्रैल, 2026 से देश में नए श्रम कानूनों (Labour Codes) के लागू होने के साथ ही कर्मचारियों के वेतन और ग्रेच्युटी से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव आया है। सरकार के इस कदम का उद्देश्य कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा और रिटायरमेंट फंड को मजबूत करना है। हालांकि, इस नए ’50 प्रतिशत वेज’ नियम के कारण कर्मचारियों की इन-हैंड सैलरी में थोड़ी कमी आने की संभावना है।

50% वेज नियम का गणित: नए नियमों के मुताबिक, किसी भी कर्मचारी का मूल वेतन (Basic Pay) उसके कुल वेतन (CTC) का कम से कम 50% होना चाहिए। अब तक कई कंपनियां भत्तों (Allowances) को बढ़ाकर मूल वेतन को कम रखती थीं ताकि पीएफ और ग्रेच्युटी का बोझ कम रहे। अब मूल वेतन बढ़ने से पीएफ और ग्रेच्युटी में कर्मचारी और कंपनी दोनों का योगदान बढ़ जाएगा। इसका सीधा असर यह होगा कि आपके रिटायरमेंट फंड में अधिक पैसा जमा होगा, लेकिन हर महीने घर ले जाने वाली सैलरी थोड़ी कम हो सकती है।

1 साल की नौकरी पर ग्रेच्युटी का लाभ: सबसे बड़ी राहत ‘फिक्स्ड टर्म’ यानी अनुबंध पर काम करने वाले कर्मचारियों को मिली है। पुराने नियम के तहत 5 साल की निरंतर सेवा के बाद ही ग्रेच्युटी मिलती थी, लेकिन अब केवल 1 साल की सेवा पूरी करने पर भी ग्रेच्युटी का हक मिलेगा। दिलचस्प बात यह है कि नोटिस पीरियड को भी सेवा अवधि में गिना जाएगा। यानी यदि आपने 11 महीने काम किया और 2 महीने का नोटिस पीरियड सर्व किया, तो आप ग्रेच्युटी के पात्र होंगे। इस्तीफा देने, मृत्यु होने या शारीरिक अक्षमता की स्थिति में भी यह लाभ मिलता है।

कैसे होगी गणना? ग्रेच्युटी की गणना का सूत्र है— (अंतिम वेतन × 15 × नौकरी के वर्ष) ÷ 26। केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए ग्रेच्युटी की अधिकतम सीमा 25 लाख रुपये (डीए 50% होने के कारण बढ़ी हुई) और निजी क्षेत्र के लिए 20 लाख रुपये तय की गई है। इसके अलावा, ओवरटाइम का 50% हिस्सा भी अब गणना में शामिल होगा। यह नियम 21 नवंबर 2025 के बाद शामिल हुए कर्मचारियों पर तुरंत प्रभावी है।

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