सुप्रीम कोर्ट में ममता की टिप्पणियों पर बवाल! चुनाव आयोग का गंभीर आरोप, बंगाल में बढ़ सकता है तनाव

पश्चिम बंगाल के आगामी विधानसभा चुनावों से पहले मतदाता सूची संशोधन की प्रक्रिया को लेकर सियासी पारा अपने चरम पर है। प्रशासनिक कदमों और राजनीतिक बयानों के बीच अब देश की सर्वोच्च अदालत की सीधी नज़र बंगाल की कानून-व्यवस्था पर है। सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की बयानबाजी को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई।

ममता बनर्जी के बयानों पर चुनाव आयोग की आपत्ति चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की कुछ हालिया टिप्पणियां राज्य के माहौल को अस्थिर कर रही हैं। आयोग का आरोप है कि केंद्रीय सुरक्षा बलों (CRPF) को लेकर की गई टिप्पणियां लोगों के मन में डर पैदा कर रही हैं। विशेष रूप से उत्तर प्रदेश से आने वाले सुरक्षा बलों के संदर्भ में दिए गए बयानों को आयोग ने लोकतांत्रिक माहौल के लिए हानिकारक बताया है। आयोग ने सबूत के तौर पर अदालत में आवश्यक दस्तावेज और वीडियो फुटेज भी पेश किए हैं।

सुप्रीम कोर्ट की कड़ी चेतावनी और NIA जांच का आदेश सुनवाई के दौरान मालदा जिले के कालियाचक की घटना का विशेष उल्लेख किया गया। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने एक वीडियो फुटेज का हवाला दिया, जिसमें एक न्यायिक अधिकारी को अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर गहरे संकट में देखा गया। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा, “यदि राज्य प्रशासन कानून-व्यवस्था बनाए रखने में विफल रहता है, तो अदालत खुद हस्तक्षेप करने से पीछे नहीं हटेगी।”

इतना ही नहीं, मालदा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाते हुए आरोपियों को एनआईए (NIA) को सौंपने का निर्देश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस घटना से जुड़ी तमाम फाइलें राष्ट्रीय जांच एजेंसी को सौंपी जाएं। चुनावी माहौल में सुप्रीम कोर्ट की यह सक्रियता और एनआईए की एंट्री ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है। बंगाल चुनाव से ठीक पहले चुनाव आयोग की शिकायत और कोर्ट की सख्त टिप्पणियां अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा का मुख्य केंद्र बन गई हैं।

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