इस्लामाबाद में होगी ऐतिहासिक वार्ता! क्या मिडिल ईस्ट से अपनी फौज हटाएगा अमेरिका?

मिडिल ईस्ट में मंडरा रहे महायुद्ध के बादल फिलहाल छंटते नजर आ रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान को ‘नेस्तनाबूद’ करने के लिए दी गई समय सीमा खत्म होने से ठीक 95 मिनट पहले एक बड़ा कूटनीतिक उलटफेर हुआ। बुधवार सुबह ट्रंप ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर घोषणा की कि वे ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को दो सप्ताह के लिए स्थगित कर रहे हैं। इस युद्धविराम के पीछे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की महत्वपूर्ण मध्यस्थता रही है।

ट्रंप ने अपने पोस्ट में कहा, “पाकिस्तान के अनुरोध पर मैं हमला रोक रहा हूं, लेकिन शर्त यह है कि ईरान को ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए तुरंत खोलना होगा।” ईरान ने भी इस पर सहमति जताते हुए कहा है कि अगर अमेरिका आक्रमण नहीं करता है, तो उनकी सेना भी जवाबी कार्रवाई रोक देगी। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची ने स्पष्ट किया कि 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में होने वाली बैठक में भविष्य की रूपरेखा तय होगी।

ईरान ने अमेरिका के सामने जो 10 सूत्रीय प्रस्ताव रखा है, उसमें यूरेनियम संवर्धन की मंजूरी, सभी आर्थिक प्रतिबंधों को हटाना और क्षेत्र से अमेरिकी सैनिकों की वापसी जैसी कड़ी शर्तें शामिल हैं। ट्रंप ने इन शर्तों को ‘कामकाजी आधार’ (Workable Basis) माना है, जो एक बड़े समझौते की ओर इशारा कर रहा है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट के अनुसार, सीधी बातचीत की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इस बीच, तेहरान में भारतीय दूतावास ने भारतीय नागरिकों को अगले 48 घंटों तक अत्यधिक सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी है।

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