रूस यूक्रेन युद्ध के मोर्चे पर 32 भारतीयों की जान गई और सेना में भर्ती का खतरनाक जाल

रूस और यूक्रेन के बीच जारी भीषण संघर्ष अब भारतीय परिवारों के लिए मातम का कारण बन रहा है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, रूसी सेना की ओर से युद्ध लड़ते हुए अब तक 32 भारतीय नागरिकों की मृत्यु हो चुकी है। यह मुद्दा न केवल मानवीय दृष्टिकोण से गंभीर है, बल्कि नई दिल्ली और मॉस्को के कूटनीतिक संबंधों के बीच एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है।
एजेंटों का जाल और धोखे से भर्ती
भारत से रूस जाने वाले युवाओं को अक्सर ऊंचे वेतन, आकर्षक बोनस और रूसी नागरिकता दिलाने का लालच दिया जाता है। जांच में यह बात सामने आई है कि कई भारतीयों को प्लंबर, क्लीनर या निर्माण श्रमिक के रूप में काम दिलाने के नाम पर वहां ले जाया गया, लेकिन बाद में उन्हें धोखे से रूसी सेना में शामिल होने के लिए मजबूर कर दिया गया।
- भ्रामक वादे: एजेंटों द्वारा सुरक्षित भविष्य और सरकारी सुविधाओं का सपना दिखाकर युवाओं को फंसाया जाता है।
- कार्यबल का डायवर्जन: रूस में वर्तमान में लगभग 1 लाख भारतीय श्रमिक कार्यरत हैं, जिनमें से कई को युद्ध के मोर्चे पर धकेलने की खबरें चिंताजनक हैं।
बढ़ता मृत्यु और लापता होने का आंकड़ा
संसदीय आंकड़ों और हालिया रिपोर्ट्स के बीच एक बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है। दिसंबर 2025 में आधिकारिक तौर पर 26 मौतों की पुष्टि की गई थी, जो अब बढ़कर 32 हो गई है। इसी तरह, लापता भारतीयों की संख्या भी 7 से बढ़कर 12 हो चुकी है।
- कुल भर्ती: आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, अब तक लगभग 214 भारतीयों को रूसी सेना में भर्ती किया गया है।
- वापसी के प्रयास: भारत सरकार और मॉस्को स्थित दूतावास के प्रयासों से 135 भारतीयों को सुरक्षित वापस लाया जा चुका है, जबकि 35 अन्य की रिहाई के लिए प्रक्रिया अभी भी जारी है।
परिवारों का दर्द और शवों की वापसी
हाल के महीनों में कई भारतीय युवाओं के शव उनके पैतृक गांवों में पहुंचे हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर काफी आक्रोश है। जम्मू के सचिन खजूरिया, आरएस पुरा के मंजिंदर सिंह और हरियाणा के कैथल निवासी गीतिक शर्मा जैसे युवाओं की मौत ने विदेशों में रोजगार की तलाश में जाने वाले युवाओं की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 21 वर्षीय गीतिक शर्मा के परिवार के अनुसार, वह काम की तलाश में रूस गया था, लेकिन उसे जबरन युद्ध के मोर्चे पर भेज दिया गया।
कूटनीतिक प्रभाव और भविष्य की चुनौती
यह संकट भारत और रूस के बीच के तनावपूर्ण मुद्दों में से एक बन गया है। भारत सरकार लगातार मॉस्को पर दबाव बना रही है कि भारतीय नागरिकों को बिना शर्त रिहा किया जाए और उनकी स्वदेश वापसी सुनिश्चित की जाए। यह घटनाक्रम दर्शाता है कि अवैध एजेंटों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और विदेशों में काम करने वाले भारतीयों के लिए सुरक्षा तंत्र को और मजबूत करने की तत्काल आवश्यकता है।
एक झलक
- कुल मौतें: 32 भारतीय नागरिक।
- लापता संख्या: 12 भारतीय।
- सेना में भर्ती कुल भारतीय: 214 लोग।
- सुरक्षित वापसी: 135 भारतीय वापस लौटे।
- प्रतीक्षारत रिहाई: 35 भारतीयों को वापस लाने का प्रयास जारी।
- मुख्य कारण: एजेंटों द्वारा आकर्षक वेतन और नागरिकता का झांसा देना।