आईटी नियमों में बदलाव और न्यूज कंटेंट पर सरकार का बड़ा फैसला

आईटी नियमों में बदलाव और न्यूज कंटेंट पर सरकार का बड़ा फैसला

भारत सरकार ने न्यूज कंटेंट और करंट अफेयर्स से जुड़ी सोशल मीडिया पोस्ट को हटाने से संबंधित प्रस्तावित आईटी नियमों पर अपने कदम पीछे खींचे हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय (MeitY) ने स्पष्ट किया है कि अब इस मसौदे पर सभी हितधारकों (स्टेकहोल्डर्स) से विस्तृत चर्चा की जाएगी और उनकी राय ली जाएगी। इसके बाद ही कोई अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

समय सीमा में विस्तार और हितधारकों की भागीदारी

आईटी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन ने बताया कि 30 मार्च को जारी किए गए आईटी नियम 2021 के संशोधन मसौदे पर फीडबैक देने की आखिरी तारीख 14 अप्रैल तय की गई थी। हालांकि, इंडस्ट्री और सिविल सोसायटी ग्रुप्स के साथ हुई हालिया बैठक के बाद इस समय सीमा को बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि डिजिटल मीडिया से जुड़े सभी पक्षों को अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर मिले।

प्रभाव के दायरे में कंटेंट क्रिएटर्स और इंफ्लुएंसर्स

प्रस्तावित संशोधनों में सबसे महत्वपूर्ण बदलाव ‘भाग-3’ के दायरे का विस्तार है। अब इसके तहत केवल पंजीकृत डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स ही नहीं, बल्कि स्वतंत्र कंटेंट क्रिएटर्स और सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स भी आएंगे। यदि कोई व्यक्ति फेसबुक, एक्स (पूर्व में ट्विटर) या किसी अन्य प्लेटफॉर्म पर समाचार या समसामयिक घटनाओं से संबंधित सामग्री पोस्ट करता है, तो उसे उसी नियामक ढांचे का पालन करना होगा जो बड़े समाचार संस्थानों पर लागू होता है।

कंटेंट हटाने की प्रक्रिया और मंत्रालय की भूमिका

नए नियमों के प्रभावी होने के बाद सरकार के पास आपत्तिजनक न्यूज कंटेंट को हटाने का निर्देश देने की शक्ति होगी। इस प्रक्रिया को दो हिस्सों में बांटा गया है:

  • सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय: यह मंत्रालय तय करेगा कि कोई पोस्ट ‘न्यूज और करंट अफेयर्स’ की श्रेणी में आती है या नहीं। आपत्तिजनक न्यूज कंटेंट को हटाने का अंतिम अधिकार इसी मंत्रालय के पास होगा।
  • आईटी मंत्रालय: अन्य प्रकार की सामान्य आपत्तिजनक पोस्ट को हटाने के निर्देश इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय द्वारा जारी किए जाएंगे।
  • अपील प्रक्रिया: यदि किसी यूजर की पोस्ट हटाई जाती है, तो उसे स्पष्टीकरण या शिकायत के लिए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से संपर्क करना होगा।

उठ रहे हैं पारदर्शिता पर सवाल

विशेषज्ञों और सिविल सोसायटी के बीच इस बात को लेकर बहस तेज है कि किसी पोस्ट को ‘न्यूज’ के तौर पर परिभाषित करने का पैमाना क्या होगा। आलोचकों का तर्क है कि यह शक्ति सरकार को किसी भी स्वतंत्र राय या सूचना को नियंत्रित करने का अवसर दे सकती है। यही कारण है कि सरकार ने अब व्यापक विचार-विमर्श का रास्ता चुना है ताकि नियमों में स्पष्टता और पारदर्शिता बनी रहे।

एक झलक

  • आईटी नियमों के मसौदे पर फीडबैक देने की 14 अप्रैल की डेडलाइन बढ़ाई गई।
  • कंटेंट क्रिएटर्स और इंफ्लुएंसर्स भी अब डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स के नियमों के दायरे में आएंगे।
  • न्यूज से जुड़ी आपत्तिजनक पोस्ट हटाने का फैसला सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय करेगा।
  • सभी स्टेकहोल्डर्स से राय लेने के बाद ही नियमों को अंतिम रूप दिया जाएगा।

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