छत्तीसगढ़ में सख्त धर्मांतरण कानून लागू अब अवैध मतांतरण पर होगी उम्रकैद

छत्तीसगढ़ में सख्त धर्मांतरण कानून लागू अब अवैध मतांतरण पर होगी उम्रकैद

छत्तीसगढ़ में जबरन और अवैध धर्मांतरण को रोकने के लिए सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। बजट सत्र में पारित ‘छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026’ पर राज्यपाल रमेन डेका ने अपनी मुहर लगा दी है। राज्यपाल की स्वीकृति के साथ ही अब यह विधेयक पूरे राज्य में कानून के रूप में प्रभावी हो गया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व वाली सरकार ने सत्ता में आने के बाद प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान की रक्षा और अवैध मतांतरण पर लगाम लगाने का जो वादा किया था, यह कानून उसी दिशा में एक ठोस कदम माना जा रहा है।

धर्मांतरण के लिए अब लेनी होगी अनुमति

नए कानून के तहत अब अपनी इच्छा से धर्म परिवर्तन करने वालों के लिए भी प्रक्रिया को काफी सख्त और पारदर्शी बनाया गया है।

  • पूर्व आवेदन: किसी भी व्यक्ति को मतांतरण से पहले निर्धारित प्राधिकृत अधिकारी के पास आवेदन करना अनिवार्य होगा।
  • सार्वजनिक सूचना: आवेदन की जानकारी संबंधित वेबसाइट, ग्राम पंचायत और स्थानीय थाने के सूचना पटल पर प्रदर्शित की जाएगी।
  • दावा और जांच: आवेदन मिलने के बाद 30 दिनों का समय दावा या आपत्ति दर्ज कराने के लिए दिया जाएगा। इस दौरान पुलिस और प्रशासन जांच करेंगे।
  • सत्यापन प्रक्रिया: गवाहों से पूछताछ और शपथ पत्र की बारीकी से जांच के बाद ही आवेदन को वैध घोषित किया जाएगा।
  • समय सीमा: यदि आवेदन वैध होने की तिथि से 90 दिनों के भीतर मतांतरण नहीं होता है, तो पूरी प्रक्रिया स्वतः समाप्त हो जाएगी।

सामूहिक मतांतरण पर आजीवन कारावास

राज्य सरकार ने इस कानून में अवैध रूप से धर्म परिवर्तन कराने वालों के खिलाफ कड़े दंड का प्रावधान किया है।

  • यदि दो या दो से अधिक व्यक्तियों का सामूहिक मतांतरण अवैध तरीके से या दबाव डालकर कराया जाता है, तो दोषियों को आजीवन कारावास की सजा हो सकती है।
  • विधेयक के 6 अध्यायों और 31 बिंदुओं में अवैध मतांतरण को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है, जिसमें भारी जुर्माने का भी प्रावधान है।

धर्मगुरुओं के लिए नई गाइडलाइंस

अंतर-धार्मिक विवाह संपन्न कराने वाले धर्मगुरुओं (जैसे फादर, प्रीस्ट, मौलवी आदि) पर भी अब बड़ी जिम्मेदारी होगी। विवाह समारोह से कम से कम 8 दिन पहले संबंधित सक्षम अधिकारी के पास घोषणा पत्र जमा करना अनिवार्य कर दिया गया है। ऐसा न करने पर संबंधित धर्मगुरु के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जा सकेगी।

कानून का राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव

गृहमंत्री विजय शर्मा ने 19 मार्च को विधानसभा में इस विधेयक को पेश किया था, जिसे ध्वनि मत से पारित किया गया था। इस कानून का मुख्य उद्देश्य आदिवासी क्षेत्रों और ग्रामीण इलाकों में प्रलोभन या दबाव के जरिए होने वाले धर्मांतरण को रोकना है। हाल ही में मुख्यमंत्री ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात कर ‘धर्म स्वातंत्र्य विधेयक’ पर केंद्रित विशेष पत्रिका ‘दीप कमल’ भी भेंट की, जो इस कानून के प्रति सरकार की गंभीरता को दर्शाता है।

एक झलक

  • छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 को राज्यपाल की मंजूरी मिली।
  • धर्मांतरण से पहले प्रशासन को सूचना देना और 30 दिन की जांच अनिवार्य।
  • सामूहिक अवैध मतांतरण के दोषियों के लिए आजीवन कारावास की सजा।
  • धर्मगुरुओं को विवाह से 8 दिन पहले घोषणा पत्र देना होगा।
  • कानून में कुल 31 बिंदुओं के जरिए अवैध मतांतरण को परिभाषित किया गया।

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