हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का राज, ट्रंप ने मानी शर्तें; मिडिल ईस्ट में नए दौर की शुरुआत

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ दो सप्ताह के युद्धविराम की घोषणा के बाद ईरान ने इसे अपनी बड़ी जीत करार दिया है। ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने दावा किया है कि अमेरिका को ईरान के ‘१०-सूत्रीय प्रस्ताव’ को स्वीकार करने के लिए मजबूर होना पड़ा है। इस घोषणा के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भू-राजनीतिक समीकरण तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं।
ईरान की १० शर्तें और अमेरिकी समझौता: ईरान के दावों के अनुसार, इस समझौते में यूरेनियम संवर्धन की अनुमति, ईरान पर लगे सभी प्रतिबंधों को हटाना, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों को रद्द करना और ईरान को हुए नुकसान का मुआवजा देना शामिल है। इसके अलावा, हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का पूर्ण नियंत्रण और पूरे क्षेत्र से अमेरिकी सेना की वापसी जैसे कठोर प्रस्तावों पर भी चर्चा की बात कही गई है। तेहरान का मानना है कि यह उसकी प्रतिरोध की नीति की जीत है।
भारतीय उलेमाओं ने दी बधाई: भारत में शिया और सुन्नी समुदाय के धर्मगुरुओं ने इस युद्धविराम का जोरदार स्वागत किया है। ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना यासूब अब्बास ने कहा, “अमेरिका खुद को महाशक्ति समझता था, लेकिन ४०वें दिन ईरान की जीत हुई और अमेरिका-इजरायल की हार हुई।” लखनऊ में शिया मरकजी चांद कमेटी के अध्यक्ष सैयद सैफ अब्बास नकवी ने इसे दुनिया के लिए अच्छी खबर बताते हुए कहा कि ईरान ने उस ‘दुष्ट’ को रोक दिया है जो आतंक फैला रहा था।
सुन्नी धर्मगुरु मौलाना खालिद रशीद फिरंगी ने भी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि युद्ध कभी किसी समस्या का समाधान नहीं होता। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस युद्धविराम से न केवल ईरान और अमेरिका को लाभ होगा, बल्कि पूरी दुनिया को आर्थिक और मानसिक शांति मिलेगी। फिलहाल, दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह युद्धविराम भविष्य में एक स्थायी शांति संधि का रूप ले पाएगा।