यूपी की सांस्कृतिक विरासत को मिलेगा नया आयाम 403 करोड़ की योजना से संवरेंगे महापुरुषों के स्मारक

यूपी की सांस्कृतिक विरासत को मिलेगा नया आयाम 403 करोड़ की योजना से संवरेंगे महापुरुषों के स्मारक

यूपी की सांस्कृतिक विरासत को मिलेगा नया आयाम 403 करोड़ की योजना से संवरेंगे महापुरुषों के स्मारक

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने राज्य की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहरों को संजोने की दिशा में एक बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में ‘डॉ. बी.आर. आंबेडकर मूर्ति विकास योजना’ को मंजूरी दे दी गई है। इस महत्वाकांक्षी योजना का मुख्य उद्देश्य महापुरुषों, समाज सुधारकों और सांस्कृतिक विभूतियों की विरासत को संरक्षित करना और उनके स्मारकों का कायाकल्प करना है।

हर विधानसभा क्षेत्र में होगा विकास

इस योजना के तहत प्रदेश के सभी 403 विधानसभा क्षेत्रों को शामिल किया गया है। सरकार की रणनीति प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र में 10 स्मारकों का चयन कर उनका सौंदर्यीकरण करने की है। समाज कल्याण विभाग के अनुसार इस पूरी परियोजना के लिए 403 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट आवंटित किया गया है।

  • प्रत्येक स्मारक के विकास पर 10 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे।
  • योजना के दायरे में बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर, संत रविदास, कबीर, ज्योतिबा फुले और महर्षि वाल्मीकि जैसे महापुरुषों की मूर्तियां आएंगी।
  • 31 दिसंबर 2025 तक स्थापित हो चुकी मूर्तियों को इस सुरक्षा और विकास कार्यक्रम के अंतर्गत कवर किया जाएगा।

केवल सौंदर्यीकरण नहीं बल्कि बुनियादी ढांचे का होगा सुधार

यह योजना महज प्रतीकात्मक नहीं है, बल्कि स्मारकों के आसपास के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर केंद्रित है। चयनित स्थलों पर निम्नलिखित कार्य प्राथमिकता के आधार पर किए जाएंगे:

  • मूर्तियों के चारों ओर सुरक्षा के लिए बाउंड्रीवॉल का निर्माण।
  • धूप और बारिश से बचाव के लिए छत्र निर्माण।
  • स्मारक परिसर में हरियाली का विकास और लैंडस्केपिंग।
  • उचित प्रकाश व्यवस्था (लाइटिंग) और आधुनिक सौंदर्यीकरण।

सामाजिक प्रेरणा और आर्थिक प्रभाव

विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से न केवल ऐतिहासिक धरोहरें सुरक्षित होंगी, बल्कि ये स्थल जनोपयोगी केंद्रों के रूप में भी उभरेंगे। सरकार का लक्ष्य इन स्थानों को जानकारीपरक बनाना है ताकि नई पीढ़ी महापुरुषों के संघर्ष और योगदान से प्रेरणा ले सके।

इसके अतिरिक्त, निर्माण कार्यों के माध्यम से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में इन विकास कार्यों से आर्थिक गतिविधियों को गति मिलने की संभावना है। आगामी 14 अप्रैल को प्रदेश की सभी विधानसभाओं में विशेष कार्यक्रमों का आयोजन होगा, जहां सांसद और विधायक जनता को इस योजना के लाभों से अवगत कराएंगे।

एक झलक

  • कुल बजट: 403 करोड़ रुपये।
  • लक्ष्य: प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में 10 स्मारकों का कायाकल्प।
  • प्रति स्मारक खर्च: 10 लाख रुपये।
  • प्रमुख व्यक्तित्व: डॉ. आंबेडकर, संत रविदास, ज्योतिबा फुले, महर्षि वाल्मीकि आदि।
  • समय सीमा: 31 दिसंबर 2025 तक स्थापित मूर्तियों का होगा संरक्षण।
  • विशेष आयोजन: 14 अप्रैल को प्रदेशव्यापी जनजागरूकता कार्यक्रम।

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने राज्य की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहरों को संजोने की दिशा में एक बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में ‘डॉ. बी.आर. आंबेडकर मूर्ति विकास योजना’ को मंजूरी दे दी गई है। इस महत्वाकांक्षी योजना का मुख्य उद्देश्य महापुरुषों, समाज सुधारकों और सांस्कृतिक विभूतियों की विरासत को संरक्षित करना और उनके स्मारकों का कायाकल्प करना है।

हर विधानसभा क्षेत्र में होगा विकास

इस योजना के तहत प्रदेश के सभी 403 विधानसभा क्षेत्रों को शामिल किया गया है। सरकार की रणनीति प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र में 10 स्मारकों का चयन कर उनका सौंदर्यीकरण करने की है। समाज कल्याण विभाग के अनुसार इस पूरी परियोजना के लिए 403 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट आवंटित किया गया है।

  • प्रत्येक स्मारक के विकास पर 10 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे।
  • योजना के दायरे में बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर, संत रविदास, कबीर, ज्योतिबा फुले और महर्षि वाल्मीकि जैसे महापुरुषों की मूर्तियां आएंगी।
  • 31 दिसंबर 2025 तक स्थापित हो चुकी मूर्तियों को इस सुरक्षा और विकास कार्यक्रम के अंतर्गत कवर किया जाएगा।

केवल सौंदर्यीकरण नहीं बल्कि बुनियादी ढांचे का होगा सुधार

यह योजना महज प्रतीकात्मक नहीं है, बल्कि स्मारकों के आसपास के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर केंद्रित है। चयनित स्थलों पर निम्नलिखित कार्य प्राथमिकता के आधार पर किए जाएंगे:

  • मूर्तियों के चारों ओर सुरक्षा के लिए बाउंड्रीवॉल का निर्माण।
  • धूप और बारिश से बचाव के लिए छत्र निर्माण।
  • स्मारक परिसर में हरियाली का विकास और लैंडस्केपिंग।
  • उचित प्रकाश व्यवस्था (लाइटिंग) और आधुनिक सौंदर्यीकरण।

सामाजिक प्रेरणा और आर्थिक प्रभाव

विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से न केवल ऐतिहासिक धरोहरें सुरक्षित होंगी, बल्कि ये स्थल जनोपयोगी केंद्रों के रूप में भी उभरेंगे। सरकार का लक्ष्य इन स्थानों को जानकारीपरक बनाना है ताकि नई पीढ़ी महापुरुषों के संघर्ष और योगदान से प्रेरणा ले सके।

इसके अतिरिक्त, निर्माण कार्यों के माध्यम से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में इन विकास कार्यों से आर्थिक गतिविधियों को गति मिलने की संभावना है। आगामी 14 अप्रैल को प्रदेश की सभी विधानसभाओं में विशेष कार्यक्रमों का आयोजन होगा, जहां सांसद और विधायक जनता को इस योजना के लाभों से अवगत कराएंगे।

एक झलक

  • कुल बजट: 403 करोड़ रुपये।
  • लक्ष्य: प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में 10 स्मारकों का कायाकल्प।
  • प्रति स्मारक खर्च: 10 लाख रुपये।
  • प्रमुख व्यक्तित्व: डॉ. आंबेडकर, संत रविदास, ज्योतिबा फुले, महर्षि वाल्मीकि आदि।
  • समय सीमा: 31 दिसंबर 2025 तक स्थापित मूर्तियों का होगा संरक्षण।
  • विशेष आयोजन: 14 अप्रैल को प्रदेशव्यापी जनजागरूकता कार्यक्रम।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *