रेपो रेट में कोई राहत नहीं! होम लोन और कार लोन की EMI कम करने का ये है ‘मास्टर प्लान’

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने रेपो रेट को ५.২৫ प्रतिशत पर यथावत रखा है। इसका सीधा मतलब यह है कि फिलहाल होम लोन या कार लोन की EMI कम होने की कोई संभावना नहीं है। मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए यह खबर थोड़ी निराशाजनक हो सकती है, लेकिन वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि कुछ स्मार्ट वित्तीय बदलावों से आप अपने लोन का बोझ कम कर सकते हैं। पेश हैं ५ ऐसे प्रभावी तरीके:
१. ओवरड्राफ्ट सुविधा का लाभ: अपने अतिरिक्त पैसे को साधारण सेविंग्स अकाउंट में रखने के बजाय ‘लोन ओवरड्राफ्ट’ अकाउंट में रखें। इससे बैंक केवल उस राशि पर ब्याज वसूलता है जो लोन राशि और आपके जमा पैसे के बीच का अंतर होती है। इससे आपका मूलधन (Principal) तेजी से घटता है।
२. प्री-पेमेंट की रणनीति: हर साल अपने कुल लोन का कम से कम ५% से १०% हिस्सा प्री-पेमेंट के रूप में चुकाने का प्रयास करें। यदि आप साल में केवल एक अतिरिक्त EMI का भुगतान करते हैं, तो आपका २० साल का लोन करीब १२ से १५ साल में ही खत्म हो सकता है, जिससे लाखों रुपये का ब्याज बचेगा।
३. लोन बैलेंस ट्रांसफर: चूंकि RBI ने दरें नहीं बढ़ाई हैं, कई बैंक नए ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए कम ब्याज दरों की पेशकश कर रहे हैं। यदि आपका बैंक ९% ब्याज ले रहा है और कोई दूसरा बैंक ८.৫% की पेशकश कर रहा है, तो आप अपना लोन वहां ट्रांसफर कर सकते हैं। बस प्रोसेसिंग फीस का ध्यान रखें।
४. स्टेप-अप EMI का चुनाव: अक्सर लोग EMI कम करने के लिए लोन की अवधि बढ़ा लेते हैं, जो घाटे का सौदा है। इसके बजाय, जैसे-जैसे आपकी आय बढ़े, अपनी EMI की राशि बढ़ाएं। अवधि जितनी कम होगी, ब्याज का बोझ उतना ही कम होगा।
५. क्रेडिट स्कोर का उपयोग: ८०० से अधिक का क्रेडिट स्कोर आपको बैंक से मोलभाव करने की ताकत देता है। यदि आपका CIBIL स्कोर शानदार है, तो अपने मौजूदा बैंक से संपर्क करें और कम ब्याज दर की मांग करें। अच्छे ग्राहकों को बनाए रखने के लिए बैंक अक्सर दरें कम कर देते हैं।