‘समाज किस दिशा में जा रहा है?’— खुद की संतान बेचने वाली मां पर भड़के जज, जांच के आदेश

इंसानियत को शर्मसार कर देने वाला एक मामला कलकत्ता हाईकोर्ट (Calcutta High Court) के सामने आया है, जहां एक मां पर अपनी ही ४५ दिन की संतान को बेचने का विस्फोटक आरोप लगा है। मंगलवार को जब यह मामला जस्टिस देवांशु बसाक और जस्टिस मोहम्मद शब्बर रशीदी की खंडपीठ के सामने पहुंचा, तो जज भी दंग रह गए। कोर्ट ने कड़े शब्दों में सवाल किया कि समाज किस गर्त में जा रहा है, जहां एक मां अपनी संतान का सौदा कर रही है।
स्टाम्प पेपर पर हुआ सौदा यह चौंकाने वाली घटना पिछले साल मई की है। हावड़ा के सांकराइल पुलिस को सूचना मिली थी कि एक दिहाड़ी मजदूर परिवार ने अपने डेढ़ महीने के बच्चे को बेच दिया है। छापेमारी के दौरान पुलिस के हाथ १० रुपये का एक स्टाम्प पेपर लगा, जो इस घिनौने अपराध का सबसे बड़ा सबूत बना। उस अनुबंध पत्र (Agreement) पर मां के हस्ताक्षर थे, जिसमें लिखा था कि वह स्वेच्छा से बच्चा किसी और को सौंप रही है और भविष्य में उस पर अपना कोई अधिकार नहीं जताएगी।
कोर्ट की कड़ी टिप्पणी और आदेश पुलिस ने बच्चे को बरामद कर लिलुआ होम भेज दिया था, जिसके बाद आरोपी मां ने बच्चे की कस्टडी के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की। सुनवाई के दौरान जस्टिस देवांशु बसाक ने गहरी निराशा व्यक्त करते हुए कहा, “अगर बच्चा फिर से मां को दे दिया जाए, तो क्या गारंटी है कि वह उसे दोबारा नहीं बेचेगी?” आरोपी के वकील ने दलील दी कि कोर्ट किसी भी शर्त पर बच्चे को मां को सौंप दे, लेकिन बेंच ने स्पष्ट किया कि पहले इस मामले की तह तक जाना जरूरी है।
मई तक मांगी रिपोर्ट हाईकोर्ट ने सांकराइल पुलिस को आरोपी मां के खिलाफ तत्काल एफआईआर (FIR) दर्ज करने और विस्तृत जांच शुरू करने का निर्देश दिया है। अदालत ने पुलिस को मई तक अपनी जांच रिपोर्ट सौंपने को कहा है। फिलहाल बच्चा बाल कल्याण समिति की देखरेख में है। इस घटना ने न केवल गरीबी के भयावह रूप को उजागर किया है, बल्कि नैतिक मूल्यों के पतन पर भी एक बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है।