खुशखबरी! बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद भारत आ रही है ‘पद्मा की इलिश’, नए पीएम ने दिया तोहफा

भारत और बांग्लादेश के बीच इलिश (हिलसा) मछली केवल भोजन नहीं, बल्कि एक गहरा भावनात्मक जुड़ाव है। बांग्लादेश में नई सरकार के गठन और तारिक रहमान के प्रधानमंत्री बनने के बाद दोनों देशों के रिश्तों में जमी बर्फ पिघलती नजर आ रही है। खबर है कि इस बार ‘पॉएला बैसाख’ (बंगाली नववर्ष) के मौके पर बांग्लादेश से भारी मात्रा में पद्मा नदी की इलिश भारत के बाजारों में पहुंचेगी।

यूनुस सरकार के समय इलिश के निर्यात पर लगी पाबंदियों के कारण भारतीय मछली प्रेमियों को काफी निराशा हुई थी, लेकिन अब हालात बदल रहे हैं। बाजार में इलिश की मांग बढ़ते ही नकली इलिश की आवक भी बढ़ जाती है। कई बार गुजरात या मुंबई (अरब सागर) की इलिश को बांग्लादेश की इलिश बताकर महंगे दामों पर बेचा जाता है।

कैसे पहचानें असली पद्मा की इलিশ? विशेषज्ञों के अनुसार, बांग्लादेश की इलिश की पहचान उसके चमक और रंग से की जा सकती है। पद्मा की इलिश के स्केल (आँश) छोटे होते हैं और मछली का रंग चांदी जैसा सफेद और हल्का लालपन लिए होता है। इसके विपरीत, अरब सागर या गुजरात से आने वाली इलिश के स्केल बड़े होते हैं और उसका रंग थोड़ा गहरा या कालापन लिए होता है। स्वाद के मामले में पद्मा की इलिश अपनी कोमलता और खुशबू के लिए जानी जाती है। खरीदारी करते समय मछली की चमक और उसके स्केल के आकार पर ध्यान देकर आप असली इलिश की पहचान कर सकते हैं।

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