वेनेजुएला से भारत आ रहा है तेल का बड़ा खेप! रूस-ईरान संकट के बीच भारत की नई रणनीति

मध्य पूर्व में जारी तनाव और वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। रूस और ईरान पर अपनी निर्भरता को संतुलित करने के लिए भारत अब वेनेजुएला से भारी मात्रा में कच्चा तेल आयात कर रहा है। कमोडिटी एनालिटिक्स फर्म की रिपोर्ट के अनुसार, इस महीने वेनेजुएला से लगभग 10 से 12 मिलियन बैरल कच्चा तेल भारत पहुंचने की संभावना है। यह पहली बार है जब इतनी बड़ी मात्रा में वेनेजुएला से तेल का आयात किया जा रहा है।

हालांकि अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते के युद्धविराम से थोड़ी राहत मिली है, लेकिन हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग पर अनिश्चितता अभी भी बनी हुई है। भारत के लिए वेनेजुएला से तेल खरीदना एक कूटनीतिक जीत तो है, लेकिन क्या इसका फायदा आम जनता की जेब को मिलेगा?

विशेषज्ञों का कहना है कि वेनेजुएला का तेल सस्ता होने के बावजूद रिफाइनिंग के मामले में काफी ‘भारी’ (Heavy) होता है। इसे शुद्ध करने और पेट्रोल-डीजल बनाने की प्रक्रिया में अतिरिक्त खर्च आता है। इस रिफाइनिंग कॉस्ट को जोड़ने के बाद इसकी कुल लागत अंतरराष्ट्रीय बाजार के सामान्य कच्चे तेल के बराबर ही हो जाती है। इसलिए, भारी मात्रा में आयात होने के बावजूद पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तत्काल बड़ी गिरावट की उम्मीद कम है। भारत सरकार का मुख्य उद्देश्य वर्तमान में कीमतों को कम करने से ज्यादा, युद्ध जैसी स्थिति में देश में तेल की आपूर्ति को बिना रुके सुनिश्चित करना है।

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