कर्नाटक में हिंदी का दबदबा 93 प्रतिशत छात्रों ने तीसरी भाषा के रूप में किया चुनाव

कर्नाटक में हिंदी का दबदबा 93 प्रतिशत छात्रों ने तीसरी भाषा के रूप में किया चुनाव

कर्नाटक के शैक्षणिक परिदृश्य में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP 2020) और नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क (NCFSE 2023) के तहत लागू की गई नई भाषा नीति के बीच राज्य के छात्रों ने हिंदी भाषा के प्रति जबरदस्त उत्साह दिखाया है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, कर्नाटक राज्य बोर्ड के अधिकांश छात्रों ने अपनी तीसरी भाषा के रूप में हिंदी को प्राथमिकता दी है।

हिंदी के प्रति बढ़ता आकर्षण और नई नीति

सीबीएसई की तीसरी भाषा नीति 2026 के अनुसार, छात्रों को दो भारतीय भाषाओं के साथ एक विदेशी भाषा चुनने का विकल्प दिया गया है। कर्नाटक में इस नीति के कार्यान्वयन के दौरान यह दिलचस्प तथ्य सामने आया है कि 93 प्रतिशत छात्रों ने स्वेच्छा से हिंदी का चयन किया है। यह रुझान उन दावों के विपरीत है जिनमें अक्सर कहा जाता था कि दक्षिण भारतीय राज्यों में हिंदी को थोपा जा रहा है। इसके उलट, छात्र अब इसे भविष्य के अवसरों और राष्ट्रीय संपर्क की भाषा के रूप में देख रहे हैं।

क्या कहते हैं आधिकारिक आंकड़े

शिक्षा विभाग द्वारा जारी आंकड़ों से पता चलता है कि तीसरी भाषा चुनने वाले कुल 8.1 लाख छात्रों में से एक बड़ा हिस्सा हिंदी की ओर झुका है।

  • हिंदी का चयन: सामान्य पाठ्यक्रम के 7.5 लाख से अधिक छात्रों और आदर्श विद्यालयों के 4,778 छात्रों को मिलाकर कुल 7.6 लाख छात्रों ने हिंदी को चुना।
  • कन्नड़ और अंग्रेजी: हिंदी के मुकाबले केवल 11,483 छात्रों ने कन्नड़ और 32,135 छात्रों ने अंग्रेजी को तीसरी भाषा के रूप में चुना।
  • अन्य भाषाएं: उर्दू (5,544), संस्कृत (5,159), अरबी (361), तुलु (845), कोंकणी (34) और मराठी (3) को चुनने वाले छात्रों की संख्या काफी सीमित रही।

ग्रेडिंग प्रणाली और विशेषज्ञों की राय

कर्नाटक सरकार ने हाल ही में एसएसएलसी (SSLC) परीक्षाओं में तीसरी भाषा के मूल्यांकन के लिए अंकों के स्थान पर ग्रेडिंग प्रणाली को अपनाया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बदलाव ने भी छात्रों को नई भाषा सीखने के लिए प्रोत्साहित किया है।

कर्नाटक राज्य हाई स्कूल सहायक शिक्षक संघ के मानद अध्यक्ष मंजुनाथ एच. के. के अनुसार, देश की प्रमुख भाषाओं में से एक होने के कारण हिंदी का चयन एक स्वाभाविक प्रक्रिया है। छात्रों और अभिभावकों का मानना है कि हिंदी सीखने से न केवल देश के अन्य हिस्सों में संवाद करना आसान होगा, बल्कि रोजगार के अवसरों में भी वृद्धि होगी।

एक झलक

  • कर्नाटक के 93% छात्रों ने हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में अपनाया।
  • कुल 8.1 लाख छात्रों में से 7.6 लाख छात्र अब हिंदी पढ़ेंगे।
  • कन्नड़ और अंग्रेजी को तीसरी भाषा के तौर पर चुनने वालों की संख्या बेहद कम रही।
  • ग्रेडिंग प्रणाली ने भाषा सीखने के प्रति छात्रों के नजरिए को सकारात्मक बनाया है।
  • नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत यह भाषा विकल्प छात्रों को दिया गया है।

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