सदी का सबसे विनाशकारी सुपर एल नीनो बढ़ाएगा दुनिया की मुश्किलें

सदी का सबसे विनाशकारी सुपर एल नीनो बढ़ाएगा दुनिया की मुश्किलें

प्रशांत महासागर की लहरों में हो रही हलचल इस साल पूरी दुनिया के लिए एक बड़े संकट का संकेत दे रही है। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि इस साल ‘सुपर एल नीनो’ की स्थिति बन रही है, जो पिछले 100 वर्षों के सबसे शक्तिशाली मौसमी बदलावों में से एक हो सकता है। यह न केवल वैश्विक तापमान को नए रिकॉर्ड तक ले जाएगा, बल्कि भारत सहित कई देशों के लिए सूखा और बाढ़ जैसी चरम स्थितियां भी पैदा कर सकता है।

क्या है सुपर एल नीनो और क्यों है यह खतरनाक

एल नीनो एक ऐसी प्राकृतिक घटना है जब प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से का पानी सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है। जब समुद्र का तापमान सामान्य स्तर से 2 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक बढ़ जाता है, तो इसे ‘सुपर एल नीनो’ की श्रेणी में रखा जाता है। यूरोपीय मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान केंद्र के अनुसार, वर्तमान परिस्थितियां 1997-98 और 2015-16 के विनाशकारी वर्षों की याद दिला रही हैं।

मौसम के बदलते पैटर्न और वैश्विक प्रभाव

सुपर एल नीनो का प्रभाव केवल एक मौसम तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका असर कई वर्षों तक देखा जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसके कारण 2027 तक वैश्विक तापमान में भारी बढ़ोतरी हो सकती है।

  • सूखा और हीटवेव: दक्षिण-पूर्व एशिया, अफ्रीका और कैरेबियन देशों में भीषण गर्मी और सूखे की स्थिति बन सकती है।
  • अचानक बाढ़: पेरू और इक्वाडोर जैसे दक्षिण अमेरिकी देशों में सामान्य से बहुत अधिक बारिश और विनाशकारी बाढ़ आने की आशंका है।
  • तूफान की तीव्रता: प्रशांत महासागर में चक्रवातों की संख्या बढ़ सकती है, जो तटीय क्षेत्रों के लिए बड़ा खतरा साबित होंगे।

भारतीय मानसून पर संकट के बादल

भारत जैसे कृषि प्रधान देश के लिए सुपर एल नीनो एक गंभीर चुनौती है। मजबूत एल नीनो का सीधा संबंध अक्सर कमजोर मानसून से होता है।

  • खेती पर असर: उत्तर और मध्य भारत में बारिश की कमी के कारण फसलों की पैदावार प्रभावित हो सकती है।
  • जल संकट: असमान बारिश से ग्रामीण अर्थव्यवस्था और जलाशयों के जल स्तर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
  • चरम मौसम: हवा की दिशा बदलने से मानसून के देरी से आने या जल्दी लौटने जैसी अनिश्चितताएं बढ़ सकती हैं।

वैज्ञानिकों की राय और भविष्य की तैयारी

वैज्ञानिकों का कहना है कि गर्म हवा में नमी रोकने की क्षमता अधिक होती है, जिससे कुछ इलाकों में अचानक होने वाली भारी बारिश और बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है। हालांकि अभी इसकी सटीक तीव्रता पर नजर रखी जा रही है, लेकिन इसके लक्षण गर्मियों के अंत तक पूरी तरह स्पष्ट होने लगेंगे। यह स्थिति साल के अंत तक अपने चरम पर पहुंच सकती है, जिससे आने वाले कुछ साल मौसम के लिहाज से बेहद अस्थिर रहेंगे।

एक झलक में

  • प्रशांत महासागर के तापमान में रिकॉर्ड बढ़ोतरी से सुपर एल नीनो की संभावना।
  • समुद्र का तापमान सामान्य से 2 डिग्री अधिक होने पर पैदा होती है यह स्थिति।
  • भारत में कमजोर मानसून और खेती पर संकट का बड़ा खतरा।
  • 2027 तक वैश्विक तापमान के नए रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचने का अनुमान।
  • दक्षिण अमेरिका में बाढ़ और दक्षिण-पूर्व एशिया में भीषण सूखे की चेतावनी।

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