लंबी दूरी की उड़ानों के लिए पायलट ड्यूटी नियमों में डीजीसीए ने दी अस्थायी ढील

लंबी दूरी की उड़ानों के लिए पायलट ड्यूटी नियमों में डीजीसीए ने दी अस्थायी ढील

नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने लंबी दूरी की अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के संचालन को सुचारू बनाने के लिए पायलटों की उड़ान ड्यूटी समय सीमा (FDTL) के नियमों में अस्थायी रूप से ढील देने का निर्णय लिया है। यह कदम विशेष रूप से उन एयरलाइनों को राहत देने के लिए उठाया गया है जो पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण लंबे और घुमावदार हवाई मार्गों का उपयोग करने को मजबूर हैं।

परिचालन चुनौतियों और संकट का समाधान

नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अनुसार, अमेरिका, इज़रायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने हवाई मार्गों को प्रभावित किया है। लंबी दूरी की उड़ानों के लिए अब अधिक समय और संसाधनों की आवश्यकता हो रही है। संयुक्त सचिव असंगबा चुबा आओ ने स्पष्ट किया कि इस छूट का मुख्य उद्देश्य पायलटों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना है ताकि वैश्विक उड़ानों का संचालन बिना किसी बाधा के जारी रह सके।

नए FDTL नियम और विवाद की पृष्ठभूमि

पिछले वर्ष DGCA ने पायलटों की थकान कम करने के लिए सख्त FDTL नियम लागू किए थे। इन नियमों के तहत:

  • साप्ताहिक विश्राम की अवधि को 36 घंटे से बढ़ाकर 48 घंटे किया गया था।
  • पायलटों के साप्ताहिक उड़ान घंटों को सीमित किया गया था।
  • रात के समय उड़ान ड्यूटी पर सख्त प्रतिबंध लगाए गए थे।

इन नियमों के पूर्ण कार्यान्वयन के बाद, विशेष रूप से इंडिगो जैसी बड़ी एयरलाइनों को परिचालन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। दिसंबर 2025 में इंडिगो द्वारा लगभग एक हजार उड़ानें रद्द किए जाने से देश भर के हवाई अड्डों पर अव्यवस्था फैल गई थी, जिसे विपक्ष ने सरकार की नीतियों की विफलता बताया था।

सुरक्षा बनाम सुविधा की बहस

एयरलाइंस पायलट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (APAI) ने DGCA के इस ताजा फैसले पर गंभीर चिंता जताई है। एसोसिएशन का तर्क है कि नियमों में ढील देने से पायलटों की थकान बढ़ेगी, जो सीधे तौर पर विमान सुरक्षा और यात्रियों की जान के साथ समझौता है। उनका आरोप है कि पिछला संकट एयरलाइनों की खराब मानव संसाधन योजना और कर्मचारियों की कमी के कारण पैदा हुआ था, न कि नियमों की सख्ती की वजह से।

भविष्य का रोडमैप

दिल्ली हाईकोर्ट के आदेशानुसार इन नियमों को दो चरणों में लागू किया जाना था। हालांकि, मौजूदा भू-राजनीतिक संकट और एयरलाइनों की परिचालन संबंधी मजबूरियों ने नियामक को अपने रुख में बदलाव करने पर विवश किया है। इंडिगो ने आश्वासन दिया है कि तीन महीने के भीतर स्थिति सामान्य हो जाएगी, जिसके बाद नियमों का पुनर्मूल्यांकन किया जा सकता है।

एक झलक

  • मुख्य निर्णय: लंबी दूरी की उड़ानों के लिए पायलट ड्यूटी नियमों (FDTL) में अस्थायी छूट।
  • कारण: पश्चिम एशिया संकट के चलते हवाई मार्गों का लंबा होना और पायलटों की कमी।
  • प्रभाव: एयरलाइनों को उड़ानों के प्रबंधन में आसानी होगी, लेकिन पायलटों की थकान बढ़ने का डर।
  • विरोध: पायलट एसोसिएशन ने इसे सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करार दिया है।
  • इतिहास: दिसंबर 2025 में इंडिगो संकट के बाद नियमों के कार्यान्वयन पर सवाल उठे थे।

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