सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद NCERT का बड़ा कदम अब नई कमेटी तैयार करेगी 8वीं कक्षा का कोर्ट चैप्टर

सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद NCERT का बड़ा कदम अब नई कमेटी तैयार करेगी 8वीं कक्षा का कोर्ट चैप्टर

नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशन रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) ने अपनी पाठ्यपुस्तकों के कंटेंट को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा जताई गई कड़ी आपत्ति के बाद संस्थान ने कक्षा 8वीं की सामाजिक विज्ञान की किताब में ‘न्यायपालिका’ से संबंधित अध्याय को फिर से लिखने के लिए नई सिलेबस कमेटी का गठन किया है।

विवाद की जड़ और सुप्रीम कोर्ट का रुख

यह पूरा मामला 8वीं कक्षा की किताब में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार से जुड़े एक विवादित चैप्टर से शुरू हुआ था। इस अध्याय की सामग्री पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर आपत्ति जताई थी, जिसके बाद NCERT को न केवल उस चैप्टर को हटाना पड़ा, बल्कि बाजार से किताबों को वापस भी मंगवाना पड़ा। वर्तमान में इन पुरानी किताबों की ऑनलाइन बिक्री पर भी पूरी तरह रोक लगा दी गई है। अब इस चैप्टर को पूरी तरह नए सिरे से तैयार किया जा रहा है ताकि छात्रों को न्यायपालिका की सही और निष्पक्ष जानकारी मिल सके।

नई सिलेबस कमेटी का गठन और प्रमुख बदलाव

सिलेबस तय करने वाली उच्च स्तरीय ‘राष्ट्रीय पाठ्यक्रम और पठन-पाठन सामग्री कमेटी’ (NSTC) का पुनर्गठन किया गया है। इस प्रक्रिया में विशेषज्ञता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए कई नए चेहरों को जगह दी गई है।

  • कमेटी में शामिल नए विशेषज्ञ: संस्थान ने 4 नए दिग्गजों को इस समिति का हिस्सा बनाया है। इनमें IIT मद्रास के निदेशक वी कामकोटी, भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद के अध्यक्ष रघुवेन्द्र तंवर, नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति आर वेंकट राव और NCERT के संयुक्त निदेशक अमरेन्द्र प्रसाद बेहेरा शामिल हैं।
  • हटाए गए सदस्य: पुनर्गठन के दौरान तीन सदस्यों को हटाया गया है, जिनमें मिशेल डैनिनो, एम डी श्रीनिवास और दिवंगत बिबेक देबरॉय शामिल हैं।

पुनर्गठन का संभावित प्रभाव और अधिकार

NCERT के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य पाठ्यक्रम को अधिक मजबूत और संतुलित बनाना है। NSTC के पास अब कक्षा 3 से 12वीं तक की पाठ्यपुस्तकों को विकसित करने और संशोधित करने का पूर्ण अधिकार है। यह नई टीम सुनिश्चित करेगी कि भविष्य में न्यायपालिका जैसे संवेदनशील विषयों पर दी जाने वाली जानकारी कानूनी और संवैधानिक रूप से सटीक हो, जिससे छात्रों के बीच संस्थाओं के प्रति गलत धारणा न बने।

एक झलक

  • मुख्य कारण: सुप्रीम कोर्ट की फटकार और न्यायपालिका पर विवादित कंटेंट।
  • बड़ा बदलाव: पुरानी सिलेबस कमेटी भंग, 4 नए विशेषज्ञों की नियुक्ति।
  • प्रभावित कक्षा: 8वीं कक्षा की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक।
  • वर्तमान स्थिति: विवादित किताबों की बिक्री पर रोक, नया कंटेंट तैयार करने की प्रक्रिया शुरू।
  • समिति का दायरा: कक्षा 3 से 12वीं तक के पूरे पाठ्यक्रम की समीक्षा और संशोधन का अधिकार।

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