बैंकिंग और फाइनेंस सेक्टर में भारी बिकवाली, क्या मंदी की आहट दे रहा है बाजार का यह ‘ब्लैक मंडे’?

मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में अचानक आए उछाल ने भारतीय शेयर बाजार को हिलाकर रख दिया है। सप्ताह के पहले ही कारोबारी दिन सेंसेक्स में १,६०० अंकों की भारी गिरावट दर्ज की गई, जबकि निफ्टी अपने महत्वपूर्ण स्तरों से नीचे फिसल गया। इस बिकवाली का सबसे ज्यादा असर बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं से जुड़े शेयरों पर पड़ा है।

गिरावट की मुख्य वजह: अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता विफल होने के बाद वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता का माहौल है। अमेरिका द्वारा सामरिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में नौसैनिक नाकाबंदी की पहल ने पश्चिम एशिया में युद्ध की स्थिति पैदा कर दी है। इसके चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल १०० डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया है, जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला बाधित होने का डर पैदा हो गया है।

भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए खतरा: भारत अपनी तेल जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है। तेल की कीमतों में वृद्धि भारत के लिए किसी अतिरिक्त टैक्स से कम नहीं है। इससे आयात बिल बढ़ता है, रुपया कमजोर होता है और महंगाई दर में इजाफा होता है। यदि महंगाई बढ़ती है, तो भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा ब्याज दरों में कटौती की संभावना कम हो जाएगी, जो बैंकिंग सेक्टर के लिए सीधे तौर पर नकारात्मक संकेत है। आज के बाजार में ब्याज दर के प्रति संवेदनशील क्षेत्रों में सबसे ज्यादा गिरावट देखी गई।

विदेशी निवेशकों का रुख: डॉलर की मजबूती और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी के कारण विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) उभरते बाजारों से पैसा निकाल रहे हैं। हालांकि घरेलू निवेशकों (DII) ने बाजार को संभालने की कोशिश की है, लेकिन वैश्विक तनाव ने शॉर्ट टर्म में अनिश्चितता बढ़ा दी है। फिलहाल निवेशकों की नजर होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति पर टिकी है, क्योंकि आपूर्ति में मामूली बाधा भी भारतीय बाजार के लिए भारी पड़ सकती है।

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