होरमुज में फंसे १५ भारतीय टैंकर, कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग! क्या भारत में महंगा होगा रसोई गैस?

मिडल ईस्ट में बढ़ते तनाव और होरमुज जलडमरूमध्य में १५ भारतीय टैंकरों के फंसने से वैश्विक स्तर पर ईंधन का संकट गहरा गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में ५० प्रतिशत तक का उछाल देखा जा रहा है। इस बीच, भारत में आम आदमी की रसोई को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। क्या युद्ध की मार अब भारतीय चूल्हों पर पड़ेगी? क्या एलपीजी सिलेंडर के दाम रातों-रात बढ़ गए हैं? १४ अप्रैल २०२६ की रिपोर्ट के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय उथल-पुथल के बावजूद घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में फिलहाल स्थिरता बनी हुई है।
भारत सरकार ने फिलहाल घरेलू उपयोग वाले १४.२ किलो के सिलेंडर की कीमतों को नियंत्रित रखा है, जो आम उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत है। हालांकि, व्यावसायिक (Commercial) सिलेंडर का बोझ बढ़ता जा रहा है। अप्रैल के शुरुआत में ही कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में भारी बढ़ोतरी देखी गई, जिससे होटल और रेस्टोरेंट मालिकों पर दबाव बढ़ गया है। मार्च में घरेलू सिलेंडर की कीमतें एक बार बढ़ने के बाद से स्थिर हैं, लेकिन कमर्शियल एलपीजी इस महीने लगभग २०० रुपये तक महंगी हो चुकी है।
१४ अप्रैल २०२६: प्रमुख शहरों में एलपीजी की कीमतें
| शहर | घरेलू एलपीजी (₹/१४.२ किलो) | कमर्शियल एलपीजी (₹/१९ किलो) |
| दिल्ली | ९१३.०० | २०७८.५० |
| मुंबई | ९१२.५० | २०३१.०० |
| कोलकाता | ९३৯.०० | २२०৮.५० |
| चेन्नई | ९२৮.५० | २२४६.५० |
| बेंगलुरु | ९१५.५० | २१६१.०० |
कोलकाता में घरेलू सिलेंडर आज भी ९३९ रुपये पर बरकरार है। हालांकि केंद्र सरकार ने पहले पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी घटाकर राहत दी थी, लेकिन होरमुज संकट की वजह से अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ता जा रहा है। फिलहाल घरेलू गैस के दाम नहीं बढ़े हैं, लेकिन कमर्शियल गैस की बढ़ती कीमतों का असर खाने-पीने की चीजों पर पड़ सकता है।