मायापुरी का ‘जादुई’ छोले-कुलचा! एक तवे पर 70 प्लेट और 70 किलो प्याज, स्वाद ऐसा कि दीवाना बना दे।

दिल्ली के स्ट्रीट फूड की बात हो और मायापुरी के मशहूर छोले-कुलचे का जिक्र न आए, ऐसा हो ही नहीं सकता। मायापुरी का यह जायका केवल नाश्ता नहीं, बल्कि एक मुकम्मल एहसास है। सुबह से दोपहर तक यहाँ तवे पर जो हलचल दिखती है, वह किसी जादू से कम नहीं। एक साथ 50 से 70 प्लेटें तैयार करना, रोजाना 70 किलो प्याज काटना और हर 10-15 मिनट में ताजा बैच उतारना—यह यहाँ की रोजमर्रा की कहानी है। सबसे खास बात यह है कि यहाँ स्वाद और क्वालिटी से रत्ती भर भी समझौता नहीं किया जाता।
प्याज और टमाटर के दाम चाहे कितने भी बढ़ जाएं, यहाँ के कुलचे की रंगत नहीं बदलती। मक्खन, क्रीम और मसालों के मेल से तैयार हर बाइट एक अनोखा अनुभव देती है। मायापुरी के कुलचे इतने नरम होते हैं कि बिना दांत वाले बुजुर्ग भी इसे आसानी से खा सकते हैं। तवे पर कुलचे रखते ही उस पर टमाटर-अदरक का पेस्ट, प्याज, गाढ़ा मिर्च का अचार और खास सीक्रेट मसाले डाले जाते हैं। फिर शुरू होता है मक्खन और क्रीम का खेल, जिसमें कुलचों को सिर्फ गर्म नहीं किया जाता, बल्कि अच्छे से पकाया जाता है।
कुलचे के बाद असली बाजी मारता है यहाँ का ‘छोले तड़का’। हर बार ताजे तड़के के साथ छोले तैयार किए जाते हैं। मक्खन में प्याज, टमाटर और मसाले भूनकर छोले डाले जाते हैं। इसमें अदरक का इस्तेमाल तो भरपूर होता है, लेकिन लहसुन को पूरी तरह बाहर रखा गया है, जो इसके स्वाद को हल्का और लाजवाब बनाता है। कस्तूरी मेथी और पनीर की टॉपिंग इसकी खुशबू में चार चाँद लगा देती है। यहाँ की खासियत है ‘बैलेंस’—न ज्यादा तीखा, न कम नमक। यही वजह है कि मायापुरी के ये छोले-कुलचे आज भी दिल्ली के दिल पर राज कर रहे हैं।