दलित IPS अफसर की आत्महत्या, राहुल गांधी का PM मोदी को पत्र, ‘अधिकारियों पर कार्रवाई करें और वादा निभाएं’
चंडीगढ़: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने हरियाणा के आईपीएस अधिकारी वाई पूरन कुमार की आत्महत्या को ‘एक त्रासदी और संवेदनशील मामला’ बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से हस्तक्षेप की मांग की है। 7 अक्टूबर को चंडीगढ़ में आत्महत्या करने वाले पूरन कुमार के परिवार से मुलाकात के बाद, राहुल गांधी ने अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने और परिवार से किए गए वादों को पूरा करने की अपील की।
पूरन कुमार के परिवार ने आरोप लगाया है कि आईपीएस अधिकारी ने जाति-आधारित भेदभाव और वरिष्ठ अधिकारियों के उत्पीड़न के कारण आत्महत्या की।
राहुल गांधी का सीधा संदेश: परिवार से मिलने के बाद कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा, “यह एक त्रासदी है। हरियाणा के सीएम ने परिवार को न्याय दिलाने का आश्वासन दिया था, लेकिन तीन दिन बीत जाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई है।” उन्होंने कहा, “यह करोड़ों दलितों को एक गलत संदेश देता है कि आप कितने भी सफल या बुद्धिमान क्यों न हों, आपको दबाया जा सकता है।”
विपक्ष के नेता के तौर पर, राहुल गांधी ने पीएम और हरियाणा के सीएम से कहा कि वे “बेटियों को किए गए वादे को पूरा करें, अंतिम संस्कार की अनुमति दें, इस नाटक को खत्म करें, और परिवार पर दबाव बनाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करें।”
भेदभाव का आरोप और गतिरोध राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि दंपत्ति दलित हैं और “एक बात साफ है कि इस अधिकारी को हतोत्साहित करने और उनके करियर व प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाने के लिए वर्षों तक व्यवस्थित भेदभाव किया गया।”
पूरन कुमार की आत्महत्या से उपजे विवाद के बीच हरियाणा के डीजीपी शत्रुजीत कपूर को छुट्टी पर भेज दिया गया और ओम प्रकाश सिंह को डीजीपी का अतिरिक्त प्रभार दिया गया। पूरन कुमार की पत्नी ने अभी तक अपने पति के शव का पोस्टमॉर्टम करने की सहमति नहीं दी है। वह डीजीपी कपूर और बर्खास्त रोहतक एसपी नरेंद्र बिजारनिया की गिरफ्तारी की मांग पर अड़ी हैं, यह कहते हुए कि मामले में “हरियाणा के शक्तिशाली, उच्च पदस्थ अधिकारी शामिल हैं।” आत्महत्या के आठ दिन बाद भी शव मोर्चरी में पड़ा हुआ है, जिससे गतिरोध जारी है।