दुनिया में खलबली, ट्रंप ने लगाया नेशनल सिक्योरिटी टैरिफ, अब सुप्रीम कोर्ट भी नहीं हटा पाएगा यह फैसला!
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति को आगे बढ़ाते हुए एक बार फिर से बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने गुरुवार को घोषणा की कि 1 अक्टूबर से दवाओं, सेमी-ट्रकों, किचन कैबिनेट और फर्नीचर पर 25% से 100% तक का भारी टैरिफ लगाया जाएगा। इस टैरिफ से सबसे ज्यादा प्रभावित ब्रांडेड और पेटेंटेड दवा उत्पाद होंगे।
‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ का हवाला देकर लगाया टैरिफ
ट्रंप के इस फैसले की सबसे खास बात यह है कि इसे ‘राष्ट्रीय सुरक्षा नियम’ (National Security Law) के तहत लागू किया गया है। इसका मतलब यह है कि अगर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट भी इस फैसले को गलत ठहराता है, तब भी इसे हटाना संभव नहीं होगा। ट्रंप का तर्क है कि दवा उत्पादन के लिए दूसरे देशों पर निर्भर रहना अमेरिका की सुरक्षा के लिए खतरनाक है। उनका मकसद विदेशी कंपनियों को अमेरिका में ही फैक्ट्री लगाकर उत्पादन करने के लिए प्रोत्साहित करना है, ताकि अमेरिकियों को वहां नौकरी और निवेश मिले। जो कंपनियां अमेरिका में उत्पादन करेंगी, उन पर टैरिफ कम होगा, जबकि विदेशों से आयात करने वाली कंपनियों के लिए व्यापार करना मुश्किल हो जाएगा।
अमेरिका में क्या होगा इसका असर?
विदेशी दवाओं पर 100% टैरिफ की वजह से अमेरिका में दवाओं की कीमतें बढ़ सकती हैं और उनकी उपलब्धता में भी कमी आ सकती है। हालांकि, ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ (The New York Times) की एक रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप की घोषणा से संकेत मिलता है कि कुछ सबसे प्रसिद्ध और ज्यादा बिकने वाली दवाओं को इन टैरिफ से छूट मिल सकती है, जिससे इसका प्रभाव सीमित हो सकता है।
भारत पर क्या होगा असर?
अमेरिका भारत से बड़ी मात्रा में दवाइयां, खासकर जेनेरिक दवाएं, आयात करता है। अमेरिका में बिकने वाली लगभग 40% जेनेरिक दवाएं भारत से आती हैं। शुरुआत में, अगर जेनेरिक दवाओं को टैरिफ से छूट मिलती है तो यह भारत के लिए अच्छी खबर हो सकती है। लेकिन, ट्रंप जिस तरह से लगातार कड़े फैसले ले रहे हैं, उससे यह कहना मुश्किल है कि जेनेरिक दवाओं को कितने दिनों तक टैरिफ से अलग रखा जाएगा। चूँकि ट्रंप ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि टैरिफ किन उत्पादों पर और कितना लगेगा, इसलिए यह फैसला भारत के लिए चिंता का विषय है।