H-1B वीजा पर $100,000 शुल्क, भारत ने अमेरिका से बातचीत शुरू की, ट्रम्प प्रशासन के फैसले पर जताई चिंता

भारत ने एच-1बी वीजा के लिए 100,000 डॉलर (लगभग 83 लाख रुपये) का शुल्क लगाने के ट्रम्प प्रशासन के कदम के लिए नियम बनाने पर अमेरिका और अन्य हितधारकों के साथ बातचीत शुरू कर दी है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने शुक्रवार को कहा कि कुशल भारतीय प्रतिभाओं की आवाजाही दोनों देशों में नवाचार और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देती है।

ट्रम्प के फैसले का कारण और प्रभाव:

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा पिछले सप्ताह घोषित किया गया यह नया शुल्क, एच-1बी वीजा कार्यक्रम के दुरुपयोग को रोकने और उन गैर-आप्रवासी श्रमिकों के प्रवेश को प्रतिबंधित करने के उपायों का हिस्सा है, जिन्हें ‘राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा’ माना जाता है। इस निर्णय से भारतीय नागरिकों के प्रभावित होने की उम्मीद है, जिन्हें पिछले दशक में जारी किए गए सभी एच-1बी वीजा का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा मिला है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (DHS) द्वारा प्रस्तावित नियमों के संबंध में जारी अधिसूचना का हवाला दिया और बताया कि उद्योग सहित हितधारकों को अपनी टिप्पणी देने के लिए एक महीने का समय दिया गया है।

‘एकमुश्त शुल्क’ पर स्पष्टीकरण:

नए उपायों के अनावरण के बाद अमेरिका द्वारा स्पष्टीकरण और FAQ भी जारी किए गए, जिसमें यह पुष्टि शामिल थी कि 100,000 डॉलर का शुल्क नए H-1B वीजा आवेदनों के लिए केवल एक बार लगाया जाएगा।

जायसवाल ने साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में कहा, “यह कैसे होगा, यह अभी भी एक उभरती हुई स्थिति है और हम विभिन्न स्तरों पर इसमें लगे हुए हैं।” उन्होंने विदेश मंत्रालय, वाशिंगटन स्थित भारतीय दूतावास और अमेरिकी प्रशासन के बीच निरंतर संपर्क का हवाला दिया।

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