बिहार चुनाव में PK फैक्टर! अमित शाह ने बनाया सीक्रेट प्लान? युवा वोटर्स को साधने की BJP की नई रणनीति

आगामी बिहार विधानसभा चुनाव में प्रशांत किशोर (पीके) अपनी पार्टी जन सुराज के साथ एक महत्वपूर्ण फैक्टर बनकर उभरे हैं। पीके लगातार महागठबंधन और एनडीए (NDA) दोनों पर हमलावर हैं। उन्होंने बीजेपी के कद्दावर नेता मंगल पांडेय और सम्राट चौधरी सहित नीतीश कुमार के करीबी अशोक चौधरी पर भी भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं।

कई चुनावी सर्वेक्षणों में यह सामने आया है कि युवा मतदाताओं का झुकाव पीके की ओर है। पीके पूरे प्रदेश का लगातार दौरा कर रहे हैं और जनता के बीच अपनी जबरदस्त उपस्थिति दर्ज कराई है। हालांकि, बीजेपी अब तक उनके आरोपों को ‘पब्लिसिटी स्टंट’ करार दे रही है, लेकिन चुनाव पर इसके संभावित असर को वह बखूबी समझ रही है।

सूत्रों के मुताबिक खबर है कि बीजेपी ने प्रशांत किशोर से निपटने के लिए एक खास प्लान बनाया है। हालिया दौरे में अमित शाह ने भी पीके से निपटने की रणनीति पर चर्चा की और कार्यकर्ताओं को सतर्क रहने की ताकीद की है। बीजेपी की मास्टर प्लान यह है कि सार्वजनिक मंचों या मीडिया में पीके को अधिक प्रमुखता नहीं दी जाएगी। इसके बजाय, चुनावी असर को देखते हुए जमीन पर और बूथ स्तर पर अतिरिक्त सतर्कता बरती जाएगी। इसके लिए पार्टी विशेष रूप से युवाओं के बीच कई नुक्कड़ सभाएं और चुनावी सभाएं आयोजित कर सकती है।

इसके साथ ही, बीजेपी हाईकमान ने नीतीश कुमार की छवि को मजबूती देने और प्रचार अभियान की बूथ स्तर से निगरानी का निर्देश दिया है। पार्टी निष्पक्ष तरीके से यह फीडबैक ले रही है कि पीके की जमीन पर कितनी हवा है। अब तक का फीडबैक यह है कि पीके एक फैक्टर जरूर हैं, लेकिन गठबंधन उन्हें एनडीए के वोट बैंक में सेंध लगाने से रोकने में कामयाब हो सकता है।

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