‘परमाणु ब्लैकमेल से नहीं झुकेंगे’, शाहबाज शरीफ को लगाई फटका, UN में भारत का करारा जवाब
भारत ने संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ के खिलाफ ‘युद्ध जीतने’ के दावों का मज़ाक उड़ाते हुए कड़ी चेतावनी दी। भारत ने साफ कहा कि वह परमाणु ब्लैकमेल के आगे नहीं झुकेगा और आतंकवादियों एवं उनके प्रायोजकों के खिलाफ कार्रवाई करेगा।
संयुक्त राष्ट्र में भारत मिशन की फर्स्ट सेक्रेटरी पेटल गहलोत ने शाहबाज शरीफ के ‘हमने युद्ध जीत लिया’ वाले दावे पर कटाक्ष करते हुए कहा, “अगर तबाह रनवे और जले हुए हैंगर को प्रधानमंत्री शरीफ की तरह जीत माना जाए तो पाकिस्तान को इसे मनाने का पूरा हक है।”
सुबह की अपनी स्पीच में ‘बेतुके ड्रामे’ पर जवाब देते हुए गहलोत ने युद्ध के बारे में उनके दावों और भारत पर लगाए गए आरोपों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, “जहां तक आतंकवाद का सवाल है, हम साफ करते हैं कि आतंकवादियों और उनके प्रायोजकों में कोई फर्क नहीं होगा। दोनों को ज़िम्मेदार ठहराया जाएगा।” उन्होंने यह भी कहा, “हम परमाणु ब्लैकमेल के नाम पर आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं करेंगे। भारत कभी ऐसी धमकियों के आगे नहीं झुकेगा।”
पेटल गहलोत ने ज़ोर देकर कहा कि आतंकवाद पाकिस्तान की विदेश नीति का ‘केंद्र’ है। उन्होंने कहा, “कितना भी ड्रामा और कितने भी झूठ बोल लें, सच्चाई नहीं छुप सकती।” उन्होंने ‘द रेसिस्टेंस फ्रंट’ (TRF) जैसे पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवादी संगठन को बचाने की पाकिस्तान की कोशिश का भी हवाला दिया, जिसने खुद कश्मीर में 26 हिंदू और ईसाई पर्यटकों की हत्या का दावा किया था।
मई में दोनों देशों के बीच संघर्ष खत्म होने पर गहलोत ने शरीफ के दावे को ‘अजीब बात’ बताया। उन्होंने कहा कि 9 मई तक पाकिस्तान भारत पर और हमले की धमकी दे रहा था, लेकिन 10 मई को पाकिस्तानी सेना ने सीधे भारत से लड़ाई बंद करने की गुजारिश की। बीच में जो हुआ, वह यह था कि भारतीय सेना ने कई पाकिस्तानी एयरबेस को तबाह कर दिया।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ (Operation Sindoor) के तहत पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों को खत्म करने की भारत की कार्रवाई का बचाव करते हुए गहलोत ने कहा, “सच तो यह है कि हमेशा की तरह पाकिस्तान ही भारत में निर्दोष नागरिकों पर आतंकवादी हमले का ज़िम्मेदार है। हमने अपने लोगों की रक्षा करने का अधिकार इस्तेमाल किया।” गहलोत ने अंत में यह भी स्पष्ट किया कि भारत और पाकिस्तान लंबे समय से इस बात पर सहमत हैं कि उनके बीच कोई भी मुद्दा द्विपक्षीय रूप से सुलझाया जाएगा, इसमें किसी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं है।