जिस ‘भ्रष्टाचार’ ने कांग्रेस को सत्ता दिलाई, अब उसी में फंसी सरकार? कर्नाटक में ‘40% कमीशन’ के बाद अब ‘दोगुनी वसूली’ का दावा


कांग्रेस सरकार पर ठेकेदारों का गंभीर आरोप, BJP शासन से भी ज़्यादा भ्रष्टाचार

बेंगलुरु: कर्नाटक में ठेकेदारों के संगठन कर्नाटक स्टेट कॉन्ट्रैक्टर्स एसोसिएशन (KSCA) ने राज्य की कांग्रेस सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि पिछली भाजपा सरकार की तुलना में मौजूदा शासन में भ्रष्टाचार दोगुना हो गया है। संगठन ने 25 सितंबर 2025 को मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को भेजे एक पत्र में यह विस्फोटक आरोप लगाया।

KSCA का दावा है कि सरकारी विभागों में परियोजनाओं के आवंटन से लेकर ठेकेदारों के करीब ₹32,000 करोड़ रुपये के लंबित बकाया भुगतान तक में व्यापक अनियमितताएं हो रही हैं और इसे निपटाने के नाम पर कमीशन मांगा जा रहा है।

‘आश्वासन के बावजूद कमीशन दोगुना’

एसोसिएशन के अध्यक्ष आर. मंजीनाथ और महासचिव जीएम रविंद्र के हस्ताक्षर वाले इस पत्र में कहा गया है, “जब आप विपक्ष के नेता थे, तब आपने हमें आश्वासन दिया था कि आपकी सरकार बनने पर कोई कमीशन नहीं मांगा जाएगा, लेकिन हमें खेद है कि अब कमीशन की मांग दोगुनी हो गई है।” संगठन ने यह भी कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ उनकी लड़ाई ने कांग्रेस को सत्ता में आने में मदद की थी, लेकिन अब वही ठेकेदार भारी दबाव में हैं।

पक्षपात और गुणवत्ता पर सवाल

KSCA ने निर्मिति केंद्र और कर्नाटक रूरल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (KRIDL) जैसी सरकारी संस्थाओं का नाम लेते हुए आरोप लगाया कि यहां परियोजनाएं सीधे कांग्रेस नेताओं के अनुयायियों को दी जा रही हैं। ये लोग बाद में बड़े ठेकेदारों को काम सौंप देते हैं और बीच में भारी कमीशन लेते हैं। KSCA के अनुसार, इस सब-कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम के कारण काम की गुणवत्ता पर सीधा असर पड़ रहा है।

संगठन ने भुगतान प्रक्रिया पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि विभागों द्वारा वरिष्ठता का सम्मान नहीं किया जा रहा है, बल्कि केवल चुनिंदा ठेकेदारों को ही प्राथमिकता दी जा रही है। साथ ही, हर तीन महीने में लंबित बिलों का केवल 15-20% ही चुकाया जा रहा है।

यह पहली बार है जब KSCA ने लिखित रूप में कांग्रेस सरकार पर इतने बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। भाजपा शासनकाल में भी इसी संगठन ने ‘40% कमीशन’ का दावा किया था, लेकिन अब उसने और गंभीर आरोप लगाए हैं, जिससे कर्नाटक की राजनीति में बड़ी हलचल मच गई है।

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