लद्दाख क्यों जल रहा है? राज्य के दर्जे की लड़ाई में खून-खराबा, सरकार तुरंत बात करे: प्रो. सलीम इंजीनियर का बड़ा बयान

जमाअत-ए-इस्लामी हिंद (JIH) के उपाध्यक्ष प्रोफेसर सलीम इंजीनियर ने लद्दाख में हालिया हिंसा और चार लोगों की मौत पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि लद्दाख के लोगों की राज्य का दर्जा, संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने, जनजातीय अधिकारों की रक्षा और पारिस्थितिकी संरक्षण जैसी मांगें पूरी तरह से जायज हैं और सरकार को इन पर तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए।

प्रोफेसर इंजीनियर ने कहा कि JIH लद्दाख से आ रही खबरों से “अत्यंत चिंतित” है और उन्होंने सरकार तथा लोगों से “हिंसा और टकराव से बचकर” रचनात्मक बातचीत के जरिए समाधान खोजने की अपील की है। उन्होंने जोर देकर कहा कि लद्दाख की नाजुक पारिस्थितिकी, विशिष्ट आदिवासी पहचान और रणनीतिक महत्व को देखते हुए इन सुरक्षा उपायों को प्रदान करने में अब और देरी नहीं की जानी चाहिए।

उन्होंने एक और गंभीर चिंता का जिक्र किया—चीन द्वारा भारतीय क्षेत्र पर कथित अतिक्रमण और कॉर्पोरेट घरानों को बड़े पैमाने पर जमीन सौंपना, जिससे स्थानीय चरवाहों और समुदायों पर बुरा असर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि भारत की क्षेत्रीय अखंडता और स्थानीय आजीविका की रक्षा सर्वोपरि है, इसलिए इन चिंताओं का गंभीरता से समाधान किया जाना चाहिए।

प्रोफेसर सलीम इंजीनियर ने कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि संवैधानिक सुरक्षा उपायों की मांग करने वाले शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाना अनुचित है। उन्होंने सरकार से वांगचुक को तुरंत रिहा करने और मौजूदा संकट को हल करने के लिए लद्दाख के लोगों के साथ तत्काल “सार्थक, रचनात्मक बातचीत” शुरू करने का आग्रह किया है।

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