ईरान पर UN का ‘महा-बैन’ वापस, 10 साल पुराने प्रतिबंध फिर लागू, क्या तबाह होगी तेहरान की अर्थव्यवस्था?
ईरान पर संयुक्त राष्ट्र (UN) के पुराने प्रतिबंध एक बार फिर से लागू कर दिए गए हैं। परमाणु समझौते के तहत हटाए गए ये प्रतिबंध ‘स्नैपबैक’ प्रक्रिया के जरिए वापस आए हैं, जिसे तेहरान द्वारा अपनी परमाणु प्रतिबद्धताओं को लगातार पूरा न करने का परिणाम माना जा रहा है। ईरान के लिए इसे एक बड़ा झटका माना जा रहा है, जिससे उसकी अर्थव्यवस्था और विवादास्पद परमाणु कार्यक्रम पर गहरा असर पड़ेगा।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने तत्काल प्रभाव से इन प्रतिबंधों को लागू करने की अपील की है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि यदि ईरान अब भी सीधी बातचीत के लिए तैयार नहीं होता है, तो प्रतिबंधों को और भी कड़ा किया जाएगा। रुबियो ने बताया कि सुरक्षा परिषद के छह प्रस्तावों (१६९৬, १७৩৭, १७४७, ১৮০৩, ১৮৩৫ और ১৯২৯) के तहत इन प्रतिबंधों को सक्रिय किया गया है। इन प्रतिबंधों में यूरेनियम संवर्धन और बैलिस्टिक मिसाइल तकनीक के उपयोग पर रोक, पारंपरिक हथियारों के निर्यात पर प्रतिबंध और वैश्विक संपत्ति फ्रीज जैसे कड़े प्रावधान शामिल हैं।
मार्को रुबियो ने जोर देकर कहा कि कूटनीति अभी भी विकल्प है, लेकिन इसके लिए ईरान को बिना किसी रुकावट के सीधी बातचीत स्वीकार करनी होगी।
हालांकि, ईरान ने इस फैसले को ‘अनुचित और अस्वीकार्य’ बताते हुए इसका कड़ा विरोध किया है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने एक बयान में कहा कि रूस और चीन द्वारा विरोध किए जाने के बावजूद ये प्रतिबंध लगाए गए हैं। उन्होंने यह भी खुलासा किया कि अमेरिका ने पूरे एनरिच्ड यूरेनियम भंडार के बदले में तीन महीने की छूट का प्रस्ताव दिया था, जिसे ईरान ने सिरे से खारिज कर दिया। रूस ने स्पष्ट किया है कि वह इन प्रतिबंधों को लागू नहीं करेगा।