दिहाड़ी मजदूर ने किया कमाल,’सिर पर ढोईं ईंटें, टूटे फोन से NEET पढ़कर हासिल किए 677 अंक, बनी मिसाल!
यह कहानी पश्चिम बंगाल के पूर्व मेदिनीपुर जिले के रहने वाले दिहाड़ी मजदूर के बेटे शेख सरफराज की है, जिन्होंने NEET-UG परीक्षा में सफलता हासिल कर एक मिसाल पेश की है। यह कहानी उन लाखों छात्रों से अलग है जो महंगी कोचिंग के बावजूद इस कठिन परीक्षा को पास नहीं कर पाते हैं।
ईंटें ढोने से डॉक्टर बनने का सफर सरफराज का परिवार मजदूरी करके गुजर-बसर करता है। घर की खराब आर्थिक स्थिति के चलते सरफराज भी बचपन से ही मजदूरी में हाथ बंटाने लगे। वह रोजाना सुबह ६ बजे से दोपहर २ बजे तक सिर पर ईंटें ढोने का काम करते थे, जिसके बदले में उन्हें ३००-४०० रुपये मिलते थे। इसके बाद वह अपनी पढ़ाई में जुट जाते थे।
- NDA में असफल होने पर NEET की तैयारी: सरफराज का शुरुआती सपना NDA (राष्ट्रीय रक्षा अकादमी) में जाने का था। उन्होंने साल २०२२ में लिखित परीक्षा भी पास कर ली थी। लेकिन इंटरव्यू से एक महीने पहले हुए दुर्घटना के कारण वह मेडिकल परीक्षण में अयोग्य घोषित कर दिए गए। किस्मत को दोष देने के बजाय, सरफराज ने तुरंत डॉक्टर बनने का सपना देखा और NEET परीक्षा की तैयारी में जुट गए।
- टूटे फोन से ऑनलाइन क्लास: परिवार की आर्थिक तंगी ऐसी थी कि सरफराज के पास स्मार्टफोन तक नहीं था। उन्होंने अपने शिक्षक से टूटी स्क्रीन वाला फोन उधार लिया। कोचिंग का बजट न होने के कारण उन्होंने उसी टूटे फोन पर ऑनलाइन लेक्चर अटेंड किए। ८ घंटे की दिहाड़ी से लौटने के बाद वे सिर्फ १ घंटे आराम करते और फिर देर रात तक रिवीजन और पिछले सालों के पेपर हल करते थे। आसपास के लोगों ने उनका मजाक उड़ाने में कोई कमी नहीं रखी थी।
NEET में शानदार सफलता सरफराज ने साल २०२४ की NEET-UG परीक्षा में ७२० अंकों में से ६७७ अंक हासिल कर शानदार सफलता पाई। उनकी इस सफलता के बाद कोचिंग संस्थापक अलख पांडे ने उन्हें आर्थिक मदद दी, जिसके बाद उन्हें नील रतन सरकार मेडिकल कॉलेज (NRS Medical College) में दाखिला मिल गया।
सरफराज इन दिनों इसी मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे हैं। डॉक्टर बनने के बाद सरफराज का सपना है कि वह गरीब तबके के लोगों का मुफ्त इलाज करें।