तेलंगाना में ‘लाल ज़हर’! संगारेड्डी झील का पानी हुआ लाल और जहरीला, 300 एकड़ फसल बर्बाद होने का आरोप

तेलंगाना के संगारेड्डी ज़िले की नल्लाकुंटा झील से निकलकर खेतों तक पहुंचे लाल पानी के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। किसान आरोप लगा रहे हैं कि झील का पानी बदरंग और ज़हरीला हो चुका है, जिससे उनकी 300 एकड़ से अधिक की फसलें बर्बाद हो रही हैं।

बीबीसी की टीम जब हैदराबाद-नरसापुर राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित डोमडुगु गांव की झील पर पहुंची, तो वहां दम घोंटने जैसी बदबू थी, जिसके कारण दो मिनट भी रुकना मुश्किल हो गया। झील का पानी पूरी तरह लाल रंग में बदल चुका था।

ड्रग कंपनी पर किसानों का गंभीर आरोप:

स्थानीय किसानों का आरोप है कि नल्लाकुंटा झील का पानी पास की हेटेरो ड्रग्स यूनिट-1 के केमिकल वेस्ट से प्रदूषित हुआ है। किसान स्वेच्छा रेड्डी ने दावा किया कि प्रदूषित पानी एयरफोर्स एकेडमी के रास्ते से होते हुए झील तक पहुंचता है। किसान मंगैया ने बताया कि कंपनी के आने के बाद पिछले दस साल से प्रदूषण की समस्या है।

हालांकि, हेटेरो ड्रग्स ने इन आरोपों से इनकार किया है। कंपनी के इंजीनियर नागराजू ने बताया कि उनके पास ज़ीरो लिक्विड डिस्चार्ज सिस्टम है और कोई गंदा पानी बाहर नहीं जाता। उन्होंने यह भी दावा किया कि झील का लाल रंग केवल प्रदूषण से नहीं, बल्कि बैक्टीरिया, शैवाल और फंगस के कारण भी हो सकता है।

300 एकड़ फसल पर बुरा असर:

नल्लाकुंटा झील का गंदा पानी खेतों से होते हुए करीब 2 किलोमीटर दूर राजनाला झील तक जा रहा है। किसान स्वेच्छा रेड्डी ने बताया कि लाल पानी खेतों में जाने से धान की फसल खराब हो रही है, सिर्फ पत्ते आ रहे हैं और दाना नहीं बन रहा है।

किसानों के मुताबिक, 2013 में भी झील प्रदूषित हुई थी, तब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PCB) के आदेश पर कंपनी को टैंकर से गंदा पानी हटवाना पड़ा था।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का जवाब:

संगारेड्डी ज़िला प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के इंजीनियर कुमार पाठक ने बताया कि झील को लेकर पहले भी शिकायतें आई हैं। टास्क फोर्स ने जांच की है और इसकी सुनवाई पूरी हो चुकी है। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट आने के बाद ही झील के पानी की गुणवत्ता पर और आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

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