भारतीय अर्थव्यवस्था में ‘मजबूत लचीलापन’! आरबीआई की बैठक में ब्याज दरों पर क्या होगा फैसला? एक्सपर्ट्स ने दिया संकेत
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति कमेटी (MPC) की आगामी चार दिवसीय बैठक सोमवार (29 सितंबर) से शुरू हो रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस बैठक में केंद्रीय बैंक रेपो रेट को 5.5 प्रतिशत पर स्थिर रख सकता है और ब्याज दरों में कटौती की संभावना काफी कम है। बैठक के अंतिम दिन आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा एमपीसी के फैसलों का एलान करेंगे।
भारतीय अर्थव्यवस्था ने दिखाया मजबूत लचीलापन
विशेषज्ञों ने कहा कि एमपीसी की बैठक बढ़ते वैश्विक टैरिफ और उन्नत अर्थव्यवस्थाओं की राजकोषीय स्थिति को लेकर बढ़ती चिंताओं के माहौल में हो रही है। उन्होंने कहा, “भारतीय अर्थव्यवस्था ने मजबूत लचीलापन दिखाया है और 2025-26 की पहली तिमाही में पांच तिमाहियों की उच्चतम वृद्धि हासिल की है, जो मुख्य रूप से घरेलू खपत और अन्य स्थानीय कारकों से प्रेरित है।”
घरेलू आंकड़े सीमित नकारात्मक जोखिम दर्शाते हैं
विशेषज्ञों ने आगे कहा कि वैश्विक वृद्धि दर को लेकर अनिश्चितताएं बनी हुई हैं, लेकिन हालिया घरेलू आंकड़े सीमित नकारात्मक जोखिम दर्शाते हैं। हालांकि, उन्होंने आगाह किया है कि कम कर संग्रह से सरकारी पूंजीगत व्यय में कमी आ सकती है, जो उपभोग को बढ़ावा देने वाली जीएसटी दरों में कटौती के सकारात्मक विकास प्रभाव को कुछ हद तक कम कर सकता है।
इस साल रेपो रेट में 1% की कटौती हुई
पिछले महीने, अगस्त की एमपीसी बैठक में, केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट को 5.50 प्रतिशत पर स्थिर बनाए रखा था। इस वर्ष की शुरुआत से लेकर अब तक आरबीआई रेपो रेट में कुल एक प्रतिशत की कटौती कर चुका है, जिसमें फरवरी में 0.25 प्रतिशत, अप्रैल में 0.25 प्रतिशत और जून में 0.50 प्रतिशत की कटौती शामिल है।
विश्लेषकों को उम्मीद है कि एमपीसी अक्टूबर में यथास्थिति बनाए रखेगी, जिससे सीआरआर (CRR) में कटौती और आगे के राजकोषीय उपायों के पूर्ण प्रभाव को सामने आने का समय मिल जाएगा। इस निर्णय में वैश्विक कारकों पर भी विचार किया जाएगा, जिनमें अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा संभावित दरों में कटौती और चल रहे व्यापार तनाव शामिल हैं, जो ब्याज दरों के अंतर और भारतीय ऋण की विदेशी मांग को प्रभावित कर सकते हैं।