यादें आईं जवान! 65 साल की उम्र में फिर ‘स्कूल के बच्चे’ बने दोस्त, देखें जांजगीर के इस मिलन समारोह की रौनक

ज़िले के एक होटल में हाल ही में एक खास आयोजन हुआ — “मित्र मिलन समारोह”। यह आयोजन उन छात्रों का था, जिन्होंने 1973 में बिलासपुर के गवर्नमेंट मल्टीपरपज़ स्कूल से अपनी पढ़ाई पूरी की थी। लगभग 50 साल बाद, सभी पुराने दोस्त अपने जीवनसाथियों के साथ एक बार फिर मिले और उस बचपन को जिया, जिसे वे पीछे छोड़ आए थे।


गुरु को याद किया, उनके बेटे कलेक्टर को बनाया मुख्य अतिथि

इस मिलन समारोह की ख़ास बात यह रही कि सभी दोस्तों ने मिलकर अपने स्कूल के पूर्व केमिस्ट्री शिक्षक एच. जी. महोबे को याद किया। उन्हें विशेष सम्मान देने के लिए, उनके बेटे और वर्तमान में जांजगीर के कलेक्टर (ज़िलाधिकारी) जन्मेजय महोबे को भी सपत्नीक मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया।

कलेक्टर जन्मेजय महोबे ने कहा, “गुरु का स्थान आज भी सर्वोपरि है। मेरे पिताजी के विद्यार्थियों में जो उत्साह देखा, वह प्रेरणादायक है। बचपन की वो डाँट भी आज मिठास लगती है। सभी अपने-अपने क्षेत्र में सफल हैं और परिवार के साथ मिलकर जो आनंद मना रहे हैं, वह सच में अनुकरणीय है।”

गीत, संगीत और बचपने की मस्ती

कार्यक्रम में हँसी-मज़ाक, गीत और संगीत की ऐसी महफ़िल जमी कि सभी स्कूल के दिनों में पहुंच गए। 65 साल की उम्र पार करने के बावजूद, सभी तनाव से मुक्त होकर एक बार फिर अपने बचपने में चले गए और पुरानी यादों में खो गए। दोस्तों का यह उत्साह देखकर कलेक्टर भी खुद को रोक नहीं पाए और उन्होंने गाना गाकर कार्यक्रम को और खास बना दिया।

1973 में 11वीं पास करने के बाद अधिकांश छात्र अलग-अलग क्षेत्रों में चले गए थे, लेकिन कुछ साथियों के बीच संपर्क बना रहा। उन्हीं की पहल से यह सुखद मिलन संभव हो सका। 1973 बैच के छात्र डॉ. राजकुमार खेतरपाल ने कहा, “हमने सोचा नहीं था कि हम फिर से ऐसे मिलेंगे। ये मुलाक़ात हमें फिर से जवानी की ओर ले गई है।” वहीं, एक उन्नत किसान मधुसूदन सिंह ने कहा, “गाँव में रहकर खेती कर रहा हूँ, लेकिन दोस्तों की ये यादें मेरे लिए सबसे बड़ी पूँजी हैं।” दोस्तों ने यह तय किया है कि वे इस रिश्ते को बनाए रखने के लिए हर दो साल में इस तरह का कार्यक्रम आयोजित करेंगे।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *