बिहार चुनाव 2025, महागठबंधन में सीट बंटवारे पर आर-पार! वामदल और नए सहयोगियों के दबाव में RJD-कांग्रेस के घटेंगे 14 सीटें
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है, चुनाव आयोग अक्टूबर के पहले हफ्ते में कार्यक्रम का ऐलान कर सकता है। इस बीच महागठबंधन (Mahagathbandhan) के भीतर सीट बंटवारे को लेकर खींचतान तेज़ हो गई है। सूत्रों के मुताबिक, राजद (RJD) और कांग्रेस को अपने सहयोगियों को साधने के लिए 12 से 14 सीटें छोड़नी पड़ सकती हैं, जिससे दोनों दलों में आंतरिक असंतोष बढ़ रहा है।
RJD-कांग्रेस पर दबाव
2020 के चुनाव में राजद ने 144 सीटों पर चुनाव लड़ा और 75 पर जीती थी। कांग्रेस ने 70 सीटों पर दांव लगाया, लेकिन सिर्फ 19 पर सिमट गई थी। अबकी बार वीआईपी (VIP), झामुमो (JMM) और लोजपा (पारस गुट) जैसे नए सहयोगी जुड़ने से राजद और कांग्रेस पर सीटें छोड़ने का दबाव बढ़ गया है।
वामदलों की बढ़ी मांग
महागठबंधन में शामिल वामदलों ने भी इस बार ज़्यादा सीटों की मांग उठाई है। भाकपा (माले) एल ने 2020 में 19 में से 12 सीटें जीती थीं। अब पार्टी का दावा है कि उनकी ताकत बढ़ी है, लिहाज़ा उन्हें कम से कम 30-32 सीटें मिलनी चाहिए। भाकपा और माकपा भी बेहतर हिस्सेदारी चाहते हैं।
नए सहयोगियों की एंट्री का असर
वीआईपी पार्टी को लगभग एक दर्जन सीटें मिल सकती हैं, जबकि झामुमो और लोजपा (पारस) के लिए दो-दो सीटें छोड़ने पर बातचीत हो रही है। इसका सीधा असर राजद और कांग्रेस के खाते पर पड़ेगा। कांग्रेस ने अंदरूनी तौर पर साफ कर दिया है कि वह अपने मौजूदा विधायकों को फिर से टिकट देना चाहती है, लेकिन नए समीकरण में कई पुराने चेहरों का टिकट कट सकता है।
कांग्रेस खेमे में सीट बंटवारे को लेकर असहमति दिखने लगी है। वरिष्ठ सांसद तारिक अहमद हाल ही में स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक से नदारद रहे। उन्होंने सोशल मीडिया पर उम्मीदवार चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाए और कहा कि “ईमानदार और ज़मीनी कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।”
सूत्र बताते हैं कि महागठबंधन के नेताओं की लगातार बैठकें चल रही हैं और सीट-दर-सीट समीकरणों का आकलन हो रहा है। राजद और कांग्रेस अब भी सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार नहीं कर रहे हैं कि वे सीटें घटाएंगे, लेकिन अंदरखाने नेताओं को संकेत दे दिए गए हैं कि समझौता करना ही पड़ेगा। चुनाव से पहले यह खींचतान किस तरह सुलझती है, यही विपक्ष की एकजुटता तय करेगा।