‘जहां नारियों का सम्मान, वहां देवता करते हैं वास’ मनूस्मृति और गांधीजी का हवाला देकर कर्नाटक हाईकोर्ट ने दुष्कर्मी को नहीं दी जमानत

कर्नाटक हाईकोर्ट ने दुष्कर्म के एक आरोपित को जमानत देने से साफ़ मना कर दिया है। इस मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने महिलाओं की गरिमा और सम्मान की रक्षा की आवश्यकता पर बल देने के लिए मनुस्मृति (Manusmriti) के एक श्लोक और महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) के उद्धरण का हवाला दिया। यह मामला बिहार के बांका की रहने वाली १९ वर्षीय अनुसूचित जनजाति (Scheduled Tribe) की युवती से जुड़ा है, जिसके साथ बेंगलुरु के एक रेलवे स्टेशन के बाहर दुष्कर्म हुआ था।

४ सितंबर को जमानत याचिका पर फैसला सुनाते हुए जस्टिस एस. रचैया (Justice S. Rachaiah) ने मनुस्मृति का श्लोक उद्धृत किया, जिसका अर्थ है, “जहां स्त्रियों का सम्मान होता है, वहां देवता निवास करते हैं, जहां उनका सम्मान नहीं होता, वहां सभी कार्य निष्फल हो जाते हैं।

इसी तरह, उन्होंने महात्मा गांधी के प्रसिद्ध कथन को भी याद किया: “जिस दिन हर महिला रात में सड़क पर स्वतंत्र रूप से चल सकेगी, उस दिन हम कह सकते हैं कि भारत ने स्वतंत्रता प्राप्त कर ली है।” जस्टिस रचैया ने यह भी कहा कि आरोपित और अन्य द्वारा किया गया कृत्य युवती के जीवन में एक ‘दाग की तरह’ रहेगा, और उसके लिए उस पीड़ा से उबरना बहुत मुश्किल होगा।

क्या था पूरा मामला?

बांका की यह युवती जिसके माता-पिता केरल में इलायची बागान में काम करते हैं, २ अप्रैल को रात करीब १.३० बजे केरल से बेंगलुरु के केआर पुरम रेलवे स्टेशन पहुंची थी। वह अपने चचेरे भाई के साथ भोजन के लिए महादेवपुरा जा रही थी। तभी स्टेशन के पास आरोपित ने उसके भाई को पकड़ लिया और उसका साथी युवती को घसीटकर पास की जगह पर ले गया और दुष्कर्म किया। शोर मचाने पर स्थानीय लोगों की मदद से पुलिस ने दोनों आरोपितों को तुरंत पकड़ लिया था।

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