इजरायल से रिश्तों के बावजूद भारत ने 11 सालों में फिलिस्तीन को दिए लगभग $80 मिलियन, 65 साल की कुल सहायता से लगभग दोगुना!
भारत सरकार ने पिछले 11 वर्षों में फिलिस्तीन को लगभग 80 मिलियन डॉलर (8 करोड़ डॉलर) की विकासात्मक और मानवीय सहायता दी है, जो पिछले 65 वर्षों में दी गई कुल राशि से लगभग दोगुनी है। भारतीय अधिकारियों के अनुसार, 2014 से दी गई यह सहायता न केवल परियोजनाओं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे से संबंधित कई कार्यक्रमों में भी इस्तेमाल हुई है।
गाजा संघर्ष और इजरायल के विरोध के बावजूद, भारत ने फिलिस्तीन को अपना समर्थन बरकरार रखा है। इजरायल के प्रतिबंधों के बावजूद, भारत संयुक्त राष्ट्र राहत एवं कार्य एजेंसी (UNRWA) को सालाना 5 मिलियन डॉलर प्रदान कर रहा है। 2020-21 से अब तक UNRWA को भारत द्वारा हस्तांतरित कुल राशि 27.5 मिलियन डॉलर है। इसके अतिरिक्त, लगभग 40 मिलियन डॉलर की परियोजनाएं वर्तमान में कार्यान्वयन के लिए पाइपलाइन में हैं।
आलोचना और भारत का स्पष्ट रुख:
इतनी बड़ी सहायता के बावजूद, भारत सरकार को जून 2025 में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में युद्धविराम प्रस्ताव पर मतदान से परहेज करने के लिए “गाजा संघर्ष पर रुख बदलने” की आलोचना झेलनी पड़ी है।
हालांकि, भारतीय अधिकारी इस आलोचना को खारिज करते हुए कहते हैं कि भारत की नीति अपरिवर्तित है। भारत लगातार ‘द्वि-राष्ट्र समाधान’ (Two-State Solution) का समर्थन करता रहा है और पिछले 10 वर्षों में इस मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र के 175 प्रस्तावों के खिलाफ कभी मतदान नहीं किया है।
इजरायल-हमास युद्ध पर भारत का रुख संतुलित रहा है। भारत ने 7 अक्टूबर, 2023 को हमास के आतंकवादी हमलों की कड़ी निंदा की और इजरायल के आत्मरक्षा के अधिकार का समर्थन किया। साथ ही, इसने गाजा में नागरिकों के हताहत होने पर गहरी चिंता व्यक्त की और अंतर्राष्ट्रीय मानवीय कानून के पालन का आग्रह किया। इसलिए, भारत ने लगातार युद्धविराम, सभी बंधकों की रिहाई और मानवीय सहायता की सुरक्षित आपूर्ति की मांग की है।
हाल ही में इजरायली वित्त मंत्री बेजलेल स्मोट्रिच की भारत यात्रा पर सवाल उठे थे, लेकिन अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह यात्रा केवल एक लंबित निवेश समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए थी। कूटनीतिक रूप से, फिलिस्तीनी राजदूत अब्दुल्ला शावेश ने भी हाल ही में भारत के रुख पर संतोष व्यक्त किया है। भारत ने बार-बार दोहराया है कि स्थायी समाधान के लिए इजरायल और फिलिस्तीन के बीच शांति वार्ता जल्द से जल्द शुरू होनी चाहिए।