फर्जी डिडक्शन क्लेम करने पर होगी जेल! इनकम टैक्स विभाग हुआ सख्त, 200% पेनल्टी के साथ कानूनी कार्रवाई का खतरा

आयकर विभाग अब गलत रिफंड क्लेम को लेकर काफी सख्त हो गया है। मान लीजिए, कोई व्यक्ति 20% टैक्स स्लैब में आता है और उसने ₹1 लाख का फर्जी डिडक्शन दिखाकर करीब ₹20,000 का टैक्स बचा लिया। अगर यह गलती पकड़ी जाती है, तो उसे टैक्स, ब्याज और भारी जुर्माने के साथ कानूनी कार्रवाई का जोखिम उठाना पड़ सकता है।

आयकर कानून के मुताबिक, करदाता को न केवल बकाया टैक्स बल्कि उस पर लगभग ₹4,000 का ब्याज देना पड़ सकता है। इसके बाद, सेक्शन 270A के तहत 200% तक पेनल्टी लग सकती है, यानी ₹40,000 तक का जुर्माना। यह सब मिलाकर, गलत डिडक्शन क्लेम करने वाला व्यक्ति ₹1 लाख से भी ज्यादा का नुकसान उठा सकता है। वहीं, अगर गलत जानकारी बार-बार दी गई या यह जानबूझकर किया गया, तो आयकर विभाग जेल तक भेज सकता है

गलती सुधारने की प्रक्रिया:

अगर किसी करदाता ने रिटर्न में गलती की है, तो उसे सुधारने का मौका भी मिलता है। वित्त वर्ष 2024-25 के लिए रिवाइज्ड ITR 31 दिसंबर 2025 तक फाइल किया जा सकता है। पुराने साल की भूल सुधारने के लिए ITR-U फॉर्म का इस्तेमाल किया जा सकता है, जिसे संबंधित असेसमेंट ईयर के खत्म होने के चार वर्षों के भीतर फाइल करना संभव है।

कानूनी खतरे और खर्चे:

गलत दावा पकड़े जाने पर टैक्स और जुर्माना तो देना ही होता है, साथ ही CA या वकील की फीस और कंपाउंडिंग चार्जेज भी जोड़ें तो हजारों रुपये का अतिरिक्त खर्च आ सकता है। कई बार यह राशि ₹1 लाख रुपये से भी अधिक हो जाती है। ITR भरते वक्त हर जानकारी को सच्चाई के साथ दर्ज करना बेहद जरूरी है। गलत दावा जानबूझकर या भूल से भी किया गया हो, उसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। समय रहते संशोधित रिटर्न फाइल करना और आयकर विभाग के नोटिस का जवाब देना महत्वपूर्ण है, ताकि अतिरिक्त सजा या जुर्माना न लगे।

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