‘बाहर-अंदर से अराजकता फैलाने की कोशिश’-RSS प्रमुख नेपाल की अस्थिरता पर जताई चिंता
महाराष्ट्र में विजयादशमी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी समारोह के अवसर पर अपने संबोधन में सरसंघचालक मोहन भागवत ने पड़ोसी देशों की हालिया राजनीतिक अस्थिरता और देश की अर्थव्यवस्था को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की।
नेपाल और अराजकता पर भागवत की टिप्पणी
नेपाल का उदाहरण देते हुए RSS प्रमुख ने कहा, “जो सरकारें जनता की चिंताओं और समस्याओं से खुद को दूर रखती हैं, उन्हें जनता के तीव्र रोष का सामना करना पड़ता है।” उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि, “कुछ ताकतें केवल देश के बाहर ही नहीं, बल्कि अंदर भी अराजकता फैलाने की कोशिश कर रही हैं।”
उन्होंने पिछले तीन वर्षों में भारत के पड़ोसी क्षेत्र में हुए बड़े बदलावों का जिक्र किया। उन्होंने कहा, “सार्वजनिक आक्रोश के हिंसक प्रदर्शनों के कारण श्रीलंका, बांग्लादेश और नेपाल में सरकारें बदल गईं, जो हमारे लिए चिंता का विषय है।” उन्होंने याद दिलाया कि इन बदलावों के मूल में युवा नेतृत्व का विरोध प्रदर्शन रहा है।
भागवत के अनुसार, हालांकि सरकारों को जन-उन्मुख और संवेदनशील होना चाहिए, लेकिन देश में बदलाव लाने का एकमात्र रास्ता लोकतांत्रिक तरीका ही है। उन्होंने कहा, “हिंसक प्रदर्शनों से कोई लक्ष्य पूरा नहीं होता। इसके बजाय, उन्हें बाहर बैठी ताकतों के लिए अपना खेल खेलने का मंच मिल जाता है।”
अमेरिकी टैरिफ नीति और स्वावलंबन
सरसंघचालक ने इस दौरान अमेरिकी शुल्क नीति पर भी टिप्पणी की और देश के आत्मनिर्भरता और स्वावलंबन पर जोर दिया।
भागवत ने कहा, “हाल ही में अमेरिका ने एक नई शुल्क नीति अपनाई है। यह शायद उनके अपने लाभ के लिए है, लेकिन इसका प्रभाव सभी पर पड़ रहा है। निर्भरता मजबूरी नहीं बननी चाहिए। इसलिए हमें निश्चित रूप से स्व-निर्भर होना पड़ेगा। हमें आत्मनिर्भर होना होगा।”