प्लेग में माता-पिता को खोया, स्कूल से निकाले गए: जानें RSS के संस्थापक और पहले सरसंघचालक डॉ. केबी हेडगेवार की संघर्ष गाथा

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS), जिसकी नींव डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने रखी थी, आज अपना सौवां स्थापना दिवस मना रहा है। हिंदू राष्ट्र की परिकल्पना को साकार करने के लिए डॉ. हेडगेवार ने 1925 में विजय दशमी के दिन संघ की नींव रखी थी और वह संघ के पहले सरसंघचालक बने। हेडगेवार ने शुरुआत से ही संघ को सक्रिय राजनीति से दूर रखते हुए केवल सामाजिक-धार्मिक गतिविधियों तक सीमित रखा।

डॉ. केबी हेडगेवार का संघर्षपूर्ण बचपन

डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार का जन्म नागपुर के एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। वह अपने माता-पिता की पांचवीं संतान थे। जब केशव केवल 13 साल के थे, तो प्लेग के कारण उनके माता-पिता दोनों की मृत्यु हो गई, जिसके बाद उन्हें भारी आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ा।

उनकी शुरुआती पढ़ाई नागपुर के नील सिटी हाईस्कूल में हुई, लेकिन जब ‘वंदेमातरम’ गाने के कारण उन्हें स्कूल से निकाल दिया गया, तो उन्हें आगे की पढ़ाई के लिए यवतमाल और पुणे भेजा गया। मैट्रिक के बाद, हिंदू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी. एस. मुंजे ने उन्हें मेडिकल की पढ़ाई के लिए कोलकाता भेजा।

क्रांतिकारी और कांग्रेसी सक्रियता

कोलकाता में डॉक्टरी की पढ़ाई के दौरान, डॉ. हेडगेवार वहां देश की नामी क्रांतिकारी संस्था ‘अनुशीलन समिति’ से जुड़ गए। 1915 में नागपुर लौटने पर वह कांग्रेस में सक्रिय हुए और विदर्भ प्रांतीय कांग्रेस के सचिव भी बन गए। 1919 के आसपास, उन्होंने कांग्रेस के अमृतसर अधिवेशन में भाग लिया। उन्होंने लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक के अनुयायियों द्वारा गठित ‘राष्ट्रीय मंडल’ के सक्रिय सदस्य के रूप में भी काम किया और युवाओं को प्रेरित करने के लिए ‘राष्ट्रीय उत्सव मंडल’ की स्थापना की।

मई 1921 में, उन्हें आपत्तिजनक भाषणों के लिए ‘राजद्रोह’ के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया और एक साल के लिए जेल में डाल दिया गया। जुलाई 1922 में उनकी रिहाई पर आयोजित सार्वजनिक स्वागत समारोह को तत्कालीन वरिष्ठ कांग्रेस नेता मोतीलाल नेहरू और हकीम अजमल खान ने भी संबोधित किया था।

कांग्रेस से मोहभंग और हिंदुत्व की राह

भारत में शुरू हुए धार्मिक-राजनीतिक खिलाफत आंदोलन के चलते उनका कांग्रेस से मोहभंग हो गया। 1923 में खिलाफत आंदोलन के बाद भड़के सांप्रदायिक दंगे उनके लिए एक निर्णायक मोड़ साबित हुए। इन दंगों के बाद उनकी राह पूरी तरह हिंदुत्व की ओर चल पड़ी। हेडगेवार का मानना था कि कांग्रेस नेतृत्व हिंदुओं की चिंताओं को दूर करने में विफल रहा है, इसलिए हिंदुओं को एकजुट करने के लिए एक संगठन स्थापित करने का समय आ गया है।

दशहरे पर रखी संघ की नींव

‘हिंदू राष्ट्र’ की परिकल्पना को साकार करने के लिए 1925 में विजय दशमी के दिन डॉ. हेडगेवार ने संघ की नींव रखी। उनका मानना था कि संगठन का प्राथमिक काम हिंदुओं को एक धागे में पिरोकर एक ताकतवर समूह के तौर पर विकसित करना है।

डॉ. हेडगेवार का निधन 21 जून, 1940 को हुआ। उनके बाद माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर ने सरसंघचालक की जिम्मेदारी संभाली। इन दिनों डॉ. मोहनराव मधुकर भागवत इस पद पर कार्यरत हैं।

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