‘कला मेरी आत्मा है, ’91 साल की उम्र में मिला ऐतिहासिक फैसला, बॉम्बे हाई कोर्ट ने गूगल, अमेजन को दिया गायिका की आवाज नक़ल न करने का आदेश

मशहूर गायिका आशा भोसले के व्यक्तित्व अधिकारों (Personality Rights) को बॉम्बे हाई कोर्ट ने कानूनी सुरक्षा प्रदान की है। कोर्ट ने AI मंचों, ई-कॉमर्स साइटों और अन्य पक्षों को उनकी आवाज, छवि या पहचान के अनधिकृत उपयोग पर रोक लगा दी है। इस फैसले के बाद अब कोई भी उनकी अनुमति के बिना उनके नाम, फोटो, आवाज या समानता (likeness) का उपयोग नहीं कर सकता।

जस्टिस आरिफ एस. डॉक्टर ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि किसी सेलिब्रिटी की व्यक्तिगत विशेषताओं जैसे नाम, आवाज, तस्वीर या समानता का बिना सहमति उपयोग करना उनके व्यक्तित्व अधिकारों का उल्लंघन है। कोर्ट ने माना कि AI उपकरणों के जरिए किसी सेलिब्रिटी की आवाज की नकल करना उनकी पहचान के साथ खिलवाड़ है, और आशा भोसले की आवाज उनकी सार्वजनिक और निजी पहचान का अहम हिस्सा है।

AI और ई-कॉमर्स पर उल्लंघन के आरोप

मामले के अनुसार, मंच ‘मायके’ (Myke) पर कथित तौर पर AI के जरिए आशा भोसले की आवाज की नकल बनाई जा रही थी। वहीं, Amazon और Flipkart जैसी ई-कॉमर्स साइट्स उनकी तस्वीरों वाले पोस्टर और मर्चेंडाइज बिना अनुमति बेच रही थीं। Google का नाम भी शामिल हुआ, क्योंकि YouTube पर AI-जनित कंटेंट उनकी आवाज की नकल के साथ अपलोड हो रहा था। एक स्वतंत्र कलाकार पर भी उनकी छवि वाले कपड़े बेचने का आरोप लगा था।

डिजिटल युग में ऐतिहासिक फैसला

कोर्ट का यह फैसला ऐतिहासिक है, क्योंकि यह डिजिटल युग में सेलिब्रिटी की पहचान की रक्षा का एक मजबूत कदम है। 91 साल की आशा भोसले ने सात दशकों तक अपनी आवाज से लाखों दिल जीते हैं। ‘पिया तू अब तो आजा’, ‘दम मारो दम’ जैसे गाने उनकी विरासत हैं। इस फैसले ने न केवल उनकी पहचान को सुरक्षित किया, बल्कि अन्य कलाकारों के लिए भी एक मिसाल कायम की है।

सोशल मीडिया पर फैंस ने कोर्ट के फैसले की तारीफ की और कहा कि AI का गलत इस्तेमाल रचनात्मकता को नुकसान पहुंचा सकता है। यह मामला तकनीक और व्यक्तिगत अधिकारों के बीच संतुलन की जरूरत को उजागर करता है। आशा भोसले ने इस फैसले पर खुशी जताई और कहा कि उनकी “कला उनकी आत्मा है,” जिसकी रक्षा जरूरी है।

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