सालों में एक बार होता है ये चमत्कार! मावली माता और दंतेश्वरी देवी का पवित्र संगम, देखने उमड़ा जनसैलाब!

विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा पर्व की एक अत्यंत महत्वपूर्ण और आस्था से भरी रस्म ‘मावली परघाव’ बुधवार रात को पूरी श्रद्धा और पारंपरिक विधि-विधान के साथ संपन्न हो गई। यह रस्म बस्तर दशहरे का विशेष आकर्षण मानी जाती है, जिसमें दो देवियों के पवित्र मिलन का दिव्य स्वरूप प्रस्तुत होता है।

दंतेश्वरी मंदिर प्रांगण और कुटरूबाड़ा के समीप पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार ‘मावली परघाव’ का आयोजन किया गया। इस अवसर पर हजारों श्रद्धालु देर रात तक मंदिर प्रांगण और आस-पास के इलाकों में उमड़ते रहे। भक्तों की भारी भीड़ और वातावरण में गूंजते जयकारों ने पूरे माहौल को एक अद्वितीय धार्मिक और आध्यात्मिक रंग से भर दिया।

दो देवियों का प्रतीकात्मक संगम:

यह रस्म मां दंतेश्वरी और मां मावली के पवित्र संगम को दर्शाती है, जिसे बस्तर दशहरा के आयोजकों द्वारा ‘देवी मिलन’ कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मावली माता को दंतेश्वरी देवी की बहन माना जाता है। साल में केवल एक बार यह दिव्य मिलन देखने को मिलता है, जिसके दर्शन के लिए भक्तजन रातभर जागकर इस पवित्र पल के साक्षी बनते हैं।

इतिहास और आस्था का भव्य मेल:

बस्तर दशहरा अपनी भव्यता के लिए विश्व भर में विख्यात है। इतिहासकारों के अनुसार, यह पर्व किसी राजा की जीत से नहीं, बल्कि मां दंतेश्वरी की आराधना से जुड़ा है। यही कारण है कि यह उत्सव 75 दिनों तक मनाया जाता है और इसे दुनिया का सबसे लंबा धार्मिक उत्सव माना जाता है। ‘मावली परघाव’ के दौरान पारंपरिक वाद्य यंत्रों की गूंज, दीपों की रोशनी और लोक कलाकारों के नृत्य-गीत ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस ऐतिहासिक और धार्मिक आयोजन को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे।

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