8,500 जवान तैनात, इंटरनेट बंद! जुमे की नमाज पर बरेली में हाई अलर्ट, एक हफ्ते पहले हुई थी हिंसा
उत्तर प्रदेश का बरेली आज (3 अक्टूबर) जुमे की नमाज के चलते हाई अलर्ट पर है। पिछले हफ्ते हुई हिंसा को देखते हुए पुलिस-प्रशासन पूरी तरह से सतर्क है और चप्पे-चप्पे पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। शहर में पुलिस, पीएसी (PAC) और आरआरएफ (RRF) के 8,500 जवान तैनात किए गए हैं। वहीं, किसी भी अफवाह को फैलने से रोकने के लिए इंटरनेट सेवाएं फिर से बंद कर दी गई हैं।
इस बीच मुस्लिम धर्मगुरुओं ने लोगों से शांतिपूर्ण तरीके से नमाज पढ़ने और किसी भी तरह के प्रदर्शन में शामिल न होने की पुरजोर अपील की है।
हिंसा और गिरफ्तारियाँ: बरेली में एक हफ्ते पहले यानी 26 सितंबर को जुमे की नमाज के दिन हिंसा भड़की थी, जहां प्रदर्शनकारियों ने कई जगहों पर तोड़फोड़ और पत्थरबाजी की थी। इस हिंसा पर पुलिस का एक्शन लगातार जारी है। इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल (IMC) के अध्यक्ष मौलाना तौकीर रजा खान को हिंसा की कथित प्लानिंग में गिरफ्तार किया जा चुका है। अब तक इस मामले में कुल 81 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम: आज की नमाज को देखते हुए बरेली को अलग-अलग सुपर और स्पेशल जोन में बांटा गया है। हर सुपर जोन की जिम्मेदारी एक एसपी, दो एडिशनल एसपी और दो सीओ को सौंपी गई है। इलाके में निगरानी रखने के लिए ड्रोन कैमरों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। लोगों को सख्त चेतावनी दी गई है कि वे अपने घरों की छतों से पत्थर हटा लें; अगर किसी के घर पर पत्थर मिला तो सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जिले में गुरुवार (2 अक्टूबर) दोपहर 3 बजे से ही 48 घंटों के लिए इंटरनेट और सेवाएं बंद कर दी गई हैं।
शांति बनाए रखने की अपील: ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने लोगों से शांतिपूर्ण तरीके से नमाज अदा करने की अपील की। उन्होंने कहा, “पिछले शुक्रवार को जो हुआ वो बहुत अफसोसजनक था। मैं सभी मुसलमानों से अपील करता हूं कि नमाज़ के बाद सीधे घर जाएं और अपने काम पर ध्यान दें। विरोध प्रदर्शन, प्रदर्शन, बैनर लहराना, शोर मचाना, ये सब पैगंबर मोहम्मद की शिक्षाओं के खिलाफ हैं।” उन्होंने युवाओं से शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने की अपील की है।
जांच में बड़ा खुलासा: बरेली हिंसा की जांच में खुलासा हुआ है कि यह घटना एक हफ्ते पहले से सुनियोजित साजिश का नतीजा थी। एसएसपी ने बताया कि भीड़ जुटाने के लिए जानबूझकर नमाज का समय बदला गया था। व्हाट्सएप के जरिए 55 लोगों ने कॉल करके करीब 1,600 लोगों की भीड़ इकट्ठा की थी।