भारतीय बैंकों के लिए खुला एक्विजिशन फाइनेंसिंग का द्वार, RBI ने क्यों लिया यह फैसला? जानिए अंदर की बात!

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अब भारतीय कॉर्पोरेट कंपनियों को अधिग्रहण के लिए ऋण (Acquisition Financing) देने के लिए घरेलू बैंकों के दरवाजे खोल दिए हैं। यह कदम लंबे समय से बैंकरों की मांग पर उठाया गया है, जो इस सेगमेंट में स्वतंत्र रूप से कारोबार करना चाहते थे।

नियामक में यह ढील देने का मुख्य कारण प्राइवेट क्रेडिट प्लेयर्स (Private Credit Players) से मिल रही कड़ी प्रतिस्पर्धा को माना जा रहा है। मामले की सीधी जानकारी रखने वाले एक सूत्र के अनुसार, घरेलू बैंक अधिग्रहण फाइनेंसिंग के क्षेत्र में सख्त नियमों के कारण पीछे रह गए थे, जिसका फायदा प्राइवेट क्रेडिट खिलाड़ियों ने उठाया और इस बड़े बाजार पर अपना कब्जा जमा लिया।

घरेलू बैंक लगातार इस पर लॉबिंग कर रहे थे। RBI के इस निर्णय से अब भारतीय बैंक सीधे कॉर्पोरेट अधिग्रहण के लिए ऋण दे सकेंगे, जिससे बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और कॉर्पोरेट कंपनियों के लिए फंडिंग के विकल्प भी बढ़ेंगे। माना जा रहा है कि यह फैसला कॉर्पोरेट ऋण बाजार के समीकरणों को पूरी तरह से बदल देगा।

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