लाइफ और हेल्थ इंश्योरेंस GST से मुक्त, फिर भी प्रीमियम नहीं घटा! इनपुट टैक्स क्रेडिट का घाटा ग्राहकों पर डाल रही कंपनियां
सरकार ने GST 2.0 के तहत नोटबुक, एक्सरसाइज बुक और स्टेशनरी आइटम्स को पूरी तरह टैक्स-मुक्त (०%) कर दिया है, जो पहले १२ प्रतिशत GST स्लैब में थे। हालांकि, नोटबुक के कच्चे माल—कागज पर GST १२ प्रतिशत से बढ़ाकर १८ प्रतिशत कर दिया गया है।
इस उल्टे शुल्क ढांचे (Inverted Duty Structure) के कारण, नोटबुक की कीमतें कम होने के बजाय बढ़ गई हैं। दुकानदारों को कागज खरीदते समय १८% GST देना पड़ता है, लेकिन वे नोटबुक बेचते समय ग्राहकों से GST नहीं ले सकते। इससे इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का नुकसान होता है, जिसे वे अंतिम मूल्य में जोड़ देते हैं, जिससे नोटबुक महंगी हो जाती है।
बीमा प्रीमियम में GST छूट का लाभ न मिलने के कारण:
GST काउंसिल ने लाइफ और हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर GST को १८ प्रतिशत से घटाकर शून्य प्रतिशत (०%) कर दिया, जो २२ सितंबर से लागू हुआ। इसके बावजूद, शिकायतें हैं कि बीमा कंपनियां पॉलिसीधारकों को इस छूट का पूरा फायदा नहीं दे रही हैं।
प्रीमियम कम करने के बजाय, कंपनियों ने अलग-अलग तरीके अपनाकर प्रीमियम राशि को बरकरार रखा या बढ़ा दिया है। इसका मुख्य कारण इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का नुकसान है। GST शून्य होने से, कंपनियां एजेंट कमीशन और अन्य परिचालन सेवाओं पर दिए गए GST का ITC क्लेम नहीं कर पा रही हैं। इस बढ़ी हुई लागत को वे प्रीमियम में एडजस्ट कर रही हैं।
- स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम में वृद्धि: कई शिकायतें हैं कि GST हटने के बावजूद, उम्र बढ़ने या ‘एज ग्रुप’ बदलने का हवाला देकर हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम बढ़ा दिया गया।
- प्रीमियम को सही ठहराने के लिए नए ऐड-ऑन: कुछ कंपनियों ने अतिरिक्त कवरेज या राइडर जोड़कर प्रीमियम में बढ़ोतरी को जायज ठहराया, हालांकि ग्राहकों का कहना है कि ये लाभ पुराने प्लान में भी शामिल थे।
- मामूली प्रीमियम कटौती: कुछ ग्राहकों ने केवल २.५ प्रतिशत की मामूली कमी देखी है, जबकि GST में १८ प्रतिशत की कटौती हुई थी।
- सरकारी और IRDA हस्तक्षेप की संभावना: सोशल मीडिया पर बढ़ती शिकायतों के कारण, सरकार बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (IRDA) को इस मामले की जांच करने और कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कह सकती है।
- कुछ कंपनियों द्वारा लाभ दिया जाना: हालांकि, कुछ बीमा कंपनियों ने अपनी पॉलिसी कमीशन में कटौती करके GST छूट का पूरा लाभ ग्राहकों तक पहुँचाया है, लेकिन ऐसे मामले कम हैं।