पुलिस ने पत्रकारों को घसीटा, कैमरे तोड़े, ‘पाकिस्तान मीडिया की आजादी पर ‘काला धब्बा’, गृह मंत्री ने दिए जांच के आदेश

इस्लामाबाद नेशनल प्रेस क्लब (NPC) में गुरुवार को पत्रकारों पर कथित पुलिस हमले के विरोध में पाकिस्तान फेडरल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (PFUJ) ने शुक्रवार को राष्ट्रव्यापी ‘ब्लैक डे’ (Black Day) मनाने की घोषणा की है। इस घटना ने देश भर के मीडिया संगठनों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है।

PFUJ के अध्यक्ष अफजल बट ने कहा, “पत्रकार इस समय गुस्से में हैं।” उन्होंने यह भी घोषणा की कि इस निंदनीय कृत्य की निंदा के लिए पाकिस्तान के सभी प्रेस क्लबों पर काले झंडे फहराए जाएंगे।

डॉन (Dawn) की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने पत्रकारों पर हुए इस हमले की जांच के आदेश दिए हैं। नकवी ने कहा, “पत्रकार समुदाय के खिलाफ हिंसा किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी,” और उन्होंने जिम्मेदार लोगों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

घटनाक्रम:

पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह घटना तब हुई जब पाकिस्तान अधिकृत जम्मू और कश्मीर (POJK) के वकीलों का समुदाय प्रेस क्लब में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन कर रहा था। POJK में सुरक्षा बलों द्वारा तीन लोगों की हत्या के बाद अधिकारियों के खिलाफ गुस्सा भड़क उठा था और यह विरोध प्रदर्शन लगातार छठे दिन में प्रवेश कर गया था। पुलिस ने क्लब में घुसकर वकीलों पर हमला किया और इस दौरान कवरेज कर रहे पत्रकारों को भी निशाना बनाया।

पाकिस्तानी चैनलों पर प्रसारित और सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से प्रसारित विजुअल्स में देखा गया कि लाठी लिए पुलिसकर्मी पत्रकारों को घसीट रहे थे, उनके कैमरे तोड़ रहे थे और NPC कैंटीन के अंदर स्टाफ पर हमला कर रहे थे।

अफजल बट ने इस छापे को “पाकिस्तान के इतिहास के सबसे काले दिनों में से एक” बताया। उन्होंने चेतावनी दी कि “यह केवल इस्लामाबाद प्रेस क्लब का मुद्दा नहीं है।” उन्होंने कहा, “पूरे पाकिस्तान के प्रेस क्लबों का मानना है कि अगर वे इस सबसे बुरे घटना को नजरअंदाज करते हैं, तो कल यह कराची, लाहौर, पेशावर, या क्वेटा में भी हो सकता है।”

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