इलाज में लापरवाही पर कोर्ट ने लिया स्वत, संज्ञान, PIL दर्ज कर वन विभाग को फटकारा, 10 सप्ताह बाद होगी अगली सुनवाई
ताड़ोबा-अंधारी व्याघ्र प्रकल्प के बफर क्षेत्र में रहने वाले बाघ ‘छोटा मटका’ की लगातार बिगड़ती सेहत पर हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए एक जनहित याचिका (PIL) दर्ज की है। बुधवार को सुनवाई के दौरान न्यायालय मित्र (Amicus Curiae) एडवोकेट यशवर्धन सांबरे ने एक सुधारित अर्जी दायर कर ताड़ोबा में एक पूर्ण सुसज्जित रेस्क्यू सेंटर स्थापित करने की मांग की।
कोर्ट ने इस पर संज्ञान लेते हुए महाराष्ट्र वन विकास निगम लिमिटेड (FDCM) को रेस्क्यू सेंटर के लिए जमीन उपलब्ध कराने संबंधी नोटिस जारी किया है और जवाब प्रस्तुत करने के आदेश दिए हैं।
अखबारों की खबरों पर कोर्ट का संज्ञान: याचिका पर न्यायमूर्ति अनिल किलोर और न्यायमूर्ति रजनीश व्यास की पीठ के समक्ष सुनवाई हुई। ‘छोटा मटका’ बाघ के उपचार में लापरवाही को लेकर अखबार में प्रकाशित खबर पर संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने यह फैसला लिया और वकील यशवर्धन सांबरे को एमिकस क्यूरी नियुक्त किया। पिछली सुनवाई में कोर्ट ने वन विभाग को फटकार लगाते हुए बाघ की सेहत पर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया था।
न्यायालय मित्र ने बुधवार को सुधारित अर्जी दाखिल की, जिसके बाद कोर्ट ने FDCM को नोटिस जारी किया। वहीं, राज्य सरकार ने रिपोर्ट पेश कर जानकारी दी कि ‘छोटा मटका’ की सेहत में अब सुधार हो रहा है। कोर्ट ने इस मामले में अगली सुनवाई 10 सप्ताह बाद तय की है।
जख्मी बाघों के लिए SOP की मांग: न्यायालय मित्र एड. सांबरे ने सुधारित अर्जी में यह भी मांग की है कि जख्मी बाघ को पकड़ने, उपचार करने और उपचार पूर्ण होने के बाद उसे वापस छोड़ने के संबंध में एक एसओपी (मानक कार्यप्रणाली) तैयार की जाए। उन्होंने कोर्ट को बताया कि वर्तमान में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के दिशा-निर्देशों में इस तरह की कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं है, इसलिए संबंधित प्राधिकरणों को SOP तैयार करने के निर्देश दिए जाएं।