फज्र की नमाज तक चलती थीं सभाएं! आजम खान ने याद किए SP संस्थापक कपिलदेव सिंह के वो खास पल
बिहार में विधानसभा चुनावों के बीच कई राजनीतिक किस्से और कहानियां सुनने देखने को मिल रहे हैं। इन्हीं में राजनीतिक रूप से सबसे जागरूक उत्तर प्रदेश और बिहार से जुड़ा एक किस्सा बेहद दिलचस्प है। इस समय बिहार मुख्य रूप से एनडीए और महागठबंधन दो राजनीतिक खेमों में बंटा है। महागठबंधन को उत्तर प्रदेश की समाजवादी पार्टी (SP) का सपोर्ट है, और खुद अध्यक्ष अखिलेश यादव इस गठबंधन के लिए माहौल बनाने में जुटे हैं।
बिहार चुनाव के इस माहौल में यह जानकर हैरानी होगी कि समाजवादी पार्टी को बनाने में बिहार के एक समाजवादी नेता का अहम रोल रहा है। समाजवादी नेता कपिलदेव सिंह ही वह बिहारी नेता थे जिन्हें समाजवादी पार्टी को बनाने का क्रेडिट जाता है।
आजम खान का खुलासा: समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता आजम खान उन पलों को याद करते हुए बताते हैं, “समाजवादी पार्टी को बनाने में सबसे अहम रोल बिहार के नेता कपिल देव सिंह की रही।”
कपिलदेव सिंह को याद करते हुए आजम खान कहते हैं, “वो भी क्या चीज थे, बड़े कमाल के इंसान रहे। उनकी पूरब की जो भाषा थी, उसमें उनकी बातें सुनना दिल को सुकून देता था। इतनी कच्ची जुबान थी कि रामपुर वाले भी उनके आशिक हो गए थे।” आजम खान बताते हैं कि पहले रात की सभाओं का कोई वक्त नहीं हुआ करता था। जब वह शाम में कुर्सी डालकर अपनी बातें कहनी शुरू करते थे तो वह फज्र (सुबह) की नमाज शुरू होती थी तब तक चलती थी। फज्र की नमाज शुरू होने पर कपिल सिंह पूरे मजमे को ऐसे रोक देते थे जैसे फेविकोल से चिपका दिया हो।
मुलायम सिंह यादव कैसे हुए तैयार: आजम खान बताते हैं कि उसी कपिल सिंह का समाजवादी पार्टी बनाने का सबसे ज्यादा दबाव रहा। बार-बार कहने के बाद भी मुलायम सिंह यादव समाजवादी पार्टी की स्थापना को तैयार नहीं हो रहे थे, तब वह नाराज हो गए थे। इस पर एक दिन कपिल सिंह ने कहा, “सुनो मुलायम सिंह यादव मैं आज के बाद तुम्हारे पास नहीं आऊंगा। अगर तुम्हें पार्टी बनानी है तब तो मैं आऊंगा।” कपिल सिंह के इतना कहने के बाद ही मुलायम सिंह यादव समाजवादी पार्टी बनाने को तैयार हुए। इसलिए समाजवादी पार्टी बनाने का असल क्रेडिट कपिल सिंह को जाता है।
गौरतलब है कि बड़े समाजवादी नेता कपिलदेव सिंह ने मुलायम सिंह यादव द्वारा सरकारी पद देने की पेशकश को ठुकरा दिया था। उन्होंने सिर्फ संगठन में पद लेना स्वीकार किया। वे जीवनभर सपा के राष्ट्रीय प्रधान महासचिव बने रहे। 2002 में कपिलदेव सिंह का निधन हो गया।