चिप इकोसिस्टम को ४.९५ करोड़ रुपये का बूस्ट, ‘नई लैब ‘मेक इन इंडिया’ सेमीकंडक्टर के लिए उद्योग-तैयार कौशल विकसित करेगी

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हाल ही में आईआईटी भुवनेश्वर में ‘नमो सेमीकंडक्टर प्रयोगशाला’ की स्थापना को मंजूरी दे दी है। यह परियोजना एमपीएलएडी (MPLAD) योजना के तहत लगभग ४.९५ करोड़ रुपये की अनुमानित लागत पर वित्त पोषित की जाएगी।

सेमीकंडक्टर लैब से उम्मीद है कि यह स्वदेशी चिप विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) और पैकेजिंग के लिए उद्योग-तैयार कौशल से युवाओं को लैस करके भारत के ‘गहरे टैलेंट पूल’ में योगदान देगी। यह लैब आईआईटी भुवनेश्वर को सेमीकंडक्टर अनुसंधान और कौशल विकास के एक केंद्र के रूप में स्थापित करेगी।

यह नई लैब ‘मेक इन इंडिया’ और ‘डिज़ाइन इन इंडिया’ पहलों को और बढ़ावा देगी। यह भारत के तेजी से बढ़ते सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के लिए उत्प्रेरक का काम करेगी। मंत्रालय ने बताया कि दुनिया की २० प्रतिशत चिप डिजाइन प्रतिभा भारत में है।

आईआईटी भुवनेश्वर का चयन इसलिए किया गया क्योंकि ओडिशा को हाल ही में इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के तहत दो सेमीकंडक्टर परियोजनाओं के लिए मंजूरी मिली है— इनमें से एक सिलिकॉन कार्बाइड (SiC)-आधारित कंपाउंड सेमीकंडक्टर्स के लिए एक एकीकृत सुविधा है, और दूसरी उन्नत 3D ग्लास पैकेजिंग सुविधा है। नई लैब आईआईटी भुवनेश्वर की मौजूदा क्लीनरूम सुविधाओं और सिलिकॉन कार्बाइड रिसर्च एंड इनोवेशन सेंटर (SiCRIC) में और इजाफा करेगी।

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