वांगचुक की पत्नी का SC में बड़ा दावा, ‘पाकिस्तान-चीन लिंक’ का झूठा प्रचार गांधीवादी आंदोलन को बदनाम करने की साजिश!

जलवायु कार्यकर्ता और शिक्षाविद सोनम वांगचुक की हिरासत को चुनौती देने वाली उनकी पत्नी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश को नोटिस जारी किया है। हालांकि, कोर्ट ने तत्काल उनकी पत्नी को हिरासत के कारणों की जानकारी देने का आदेश देने से इनकार कर दिया।

याचिका में ‘झूठे नैरेटिव’ का आरोप: वांगचुक की पत्नी গীতानजलि अंग्मो द्वारा दायर याचिका में एक गंभीर आरोप लगाया गया है। याचिका में कहा गया है कि वांगचुक और उनके सहयोगियों के खिलाफ एक “झूठा और खतरनाक नैरेटिव” फैलाया जा रहा है। इसका मकसद उनके गांधीवादी आंदोलन को बदनाम करना है, जिसके लिए इसे पाकिस्तान और चीन से जोड़ा जा रहा है।

याचिका में दावा किया गया है कि ऐसी दुर्भावनापूर्ण अफवाहें लोकतांत्रिक असहमति को कलंकित करने का प्रयास हैं। जबकि वांगचुक ने हमेशा राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने के लिए काम किया है और भारतीय सेना की मदद के लिए ऊंचाई वाले इलाकों में शेल्टर जैसी तकनीकें विकसित की हैं।

गिरफ्तारी पर संवैधानिक उल्लंघन का दावा: याचिका में यह भी कहा गया है कि वांगचुक या उनकी पत्नी को अब तक गिरफ्तारी आदेश या उसके आधार नहीं बताए गए हैं, जो कि संविधान के अनुच्छेद 22(5) का स्पष्ट उल्लंघन है। इस हिरासत को गैरकानूनी और असंवैधानिक घोषित करने की मांग की गई है।

अंग्मो की सुप्रीम कोर्ट में 8 मुख्य माँगें: वांगचुक की पत्नी ने सुप्रीम कोर्ट में निम्नलिखित 8 माँगें रखी हैं:

  1. हैबियस कॉर्पस जारी कर सोनम वांगचुक को तत्काल सुप्रीम कोर्ट के सामने पेश किया जाए।
  2. पत्नी को फोन पर और व्यक्तिगत रूप से पति से मिलने की अनुमति दी जाए।
  3. सोनम वांगचुक को उनकी दवाएं, कपड़े, भोजन और आवश्यक वस्तुएं तुरंत उपलब्ध कराई जाएं।
  4. गिरफ्तारी आदेश और उससे जुड़े सभी दस्तावेज सुप्रीम कोर्ट के सामने पेश किए जाएं।
  5. गिरफ्तारी को गैरकानूनी और असंवैधानिक घोषित किया जाए।
  6. उनकी तत्काल रिहाई का आदेश दिया जाए।
  7. उनकी तात्कालिक मेडिकल जांच कर रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत की जाए।
  8. हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव्स, लद्दाख (HIAL) और उससे जुड़े छात्रों व सदस्यों के उत्पीड़न को रोका जाए।

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