डेयरी व्यवसाय में होने लगा है नुकसान? वेटरनरी सर्जन की ‘गोल्डन’ सलाह, ऐसे करें थनैला रोग की जांच

किसानों के लिए डेयरी व्यवसाय अब सिर्फ दूध का जरिया नहीं, बल्कि एक स्थायी और मुनाफे वाला अतिरिक्त आय का स्रोत बन चुका है। हजारीबाग जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में किसान अब खेती के साथ-साथ डेयरी व्यवसाय को अपना रहे हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। लेकिन कई बार गलत पशुधन खरीदने के कारण किसानों को बड़ा नुकसान झेलना पड़ता है।

इस विषय पर हजारीबाग के राजकीय पशु चिकित्सालय के वेटरनरी सर्जन डॉ. मुकेश कुमार सिन्हा ने किसानों के लिए बेहद उपयोगी जानकारी साझा की है। उन्होंने कहा कि किसी भी दुधारू पशु को खरीदने से पहले किसानों को उसका स्वास्थ्य प्रमाण पत्र (Health Certificate) अवश्य देखना चाहिए। इससे पशु के जन्म से लेकर टीकाकरण तक की पूरी जानकारी मिल जाती है। डॉ. सिन्हा ने चेतावनी दी कि अस्वस्थ पशु खरीदकर लाने से वे फार्म के अन्य स्वस्थ पशुओं में भी बीमारी फैला सकते हैं।

पशु खरीदते समय इन 3 बातों की जांच है सबसे ज़रूरी:

  1. थनैला रोग (Mastitis) की जांच: पशु खरीदते समय थनैला रोग की जांच करना बहुत ज़रूरी है। यह दुधारू पशुओं में पाया जाने वाला एक आम रोग है, जिसमें थनों में सूजन और गांठ हो जाती है। इस बीमारी से दूध उत्पादन बुरी तरह प्रभावित होता है।
  2. पशु की उम्र: पशु की उम्र एक महत्वपूर्ण कारक है। अधिक वृद्ध पशुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है, वे बार-बार बीमार पड़ते हैं और दूध भी कम देते हैं। डॉ. सिन्हा की सलाह है कि किसानों को 2 से 3 बार बच्चा दे चुकी गाय या भैंस खरीदनी चाहिए। ऐसे पशु अधिक दूध देते हैं और लंबे समय तक उपयोगी बने रहते हैं।
  3. दांत, खुर और आंखों की चमक: पशु के दांत और खुर देखकर उसकी उम्र का अंदाज़ा लगाया जा सकता है। साथ ही, पशु की आंखें चमकदार हों और बाल मुलायम हों तो यह उसके स्वस्थ होने का संकेत है। उन्होंने किसानों को सलाह दी कि पशु खरीदने के तुरंत बाद नजदीकी पशु चिकित्सक से उसका स्वास्थ्य परीक्षण ज़रूर करवाएं।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *